CG News: स्मार्ट खेती से बदली तस्वीर, केरलापाल के कालेंद्र कुमेटी बने किसानों के लिए प्रेरणा

नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से बढ़ाई उत्पादकता, समन्वित कृषि मॉडल से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

 

 

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ते कदम अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। इसका एक प्रेरक उदाहरण केरलापाल गांव के प्रगतिशील किसान कालेंद्र कुमेटी हैं, जिन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर स्मार्ट खेती को अपनाया और अपनी मेहनत व नवाचार के बल पर सफलता की नई कहानी लिखी है।

 

कुछ वर्ष पहले तक कालेंद्र कुमेटी भी सामान्य किसानों की तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। खेती की बढ़ती लागत और अपेक्षाकृत कम उत्पादन के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। बेहतर भविष्य की तलाश में उन्होंने कृषि विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल की। यही निर्णय उनके जीवन में बदलाव का आधार बना।

कालेंद्र ने खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया। उनका मानना है कि इन आधुनिक उर्वरकों से फसलों को आवश्यक पोषण मिलता है और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता भी सुरक्षित रहती है। इससे उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है और खेती की लागत पर भी नियंत्रण मिला है।

 

आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए उन्होंने समन्वित कृषि मॉडल को अपनाया। धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के साथ वे अब सब्जी उत्पादन, फलदार पौधों की खेती, पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी गतिविधियों से भी जुड़े हुए हैं। इस विविधीकरण ने उनकी आमदनी को कई गुना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कालेंद्र अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग कर रहे हैं। इससे पानी की बचत होने के साथ फसलों को आवश्यकता अनुसार सिंचाई मिल रही है। इसके अलावा वे नियमित रूप से मिट्टी परीक्षण कराकर भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करते हैं, जिससे खेती अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन रही है।

 

कालेंद्र कुमेटी की सफलता का असर अब पूरे गांव में दिखाई दे रहा है। उनकी प्रेरणा से कई किसान आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। वे स्वयं भी अपने अनुभव और ज्ञान को अन्य किसानों के साथ साझा कर उन्हें बेहतर खेती के लिए प्रेरित करते हैं।

 

कालेंद्र का मानना है कि खेती को यदि नई तकनीक, वैज्ञानिक सोच और निरंतर सीखने की भावना के साथ किया जाए तो यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें क्षेत्र के किसानों के लिए एक आदर्श बताया है। स्मार्ट खेती के माध्यम से कालेंद्र कुमेटी आज ग्रामीण कृषि विकास और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुके हैं।

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