CG News: फरसगांव उपचुनाव प्रचार का शोर थमा, भाजपा और कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत वार्ड 1 और 12 में कांटे की टक्कर, अब मतदाताओं के फैसले पर टिकी निगाहें

दंडकारण्य दर्पण

 

फरसगांव उपचुनाव प्रचार का शोर थमा, भाजपा और कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत

वार्ड 1 और 12 में कांटे की टक्कर, अब मतदाताओं के फैसले पर टिकी निगाहें

 

कोंडागांव। नगर पंचायत फरसगांव के वार्ड क्रमांक 1 और 12 में होने वाले पार्षद उपचुनाव का चुनाव प्रचार अंतिम चरण में पहुंचकर थम गया है। शनिवार शाम 5 बजे के बाद प्रचार अभियान पर विराम लग गया, जिसके साथ ही प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्यक्ष जनसंपर्क का दौर समाप्त हो गया। अब सभी की नजरें मतदान और चुनाव परिणाम पर टिकी हुई हैं।

दोनों वार्डों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से दोनों दलों ने जनसंपर्क, बैठकों और घर-घर प्रचार के माध्यम से मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का भरसक प्रयास किया। चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में कार्यकर्ताओं और नेताओं की सक्रियता चरम पर रही।

 

वार्ड क्रमांक 1 में कांग्रेस ने पूर्व पार्षद स्वर्गीय राजेश सोना के छोटे भाई उमेश सोना को उम्मीदवार बनाया है। स्वर्गीय राजेश सोना लगातार तीन बार इस वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुए थे और क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। उनके निधन के बाद हो रहे इस उपचुनाव में कांग्रेस सहानुभूति और पारिवारिक जुड़ाव के आधार पर जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश में जुटी रही।

 

वहीं भाजपा ने युवा चेहरे प्रेम नाग को मैदान में उतारा है। पार्टी संगठन ने उन्हें लेकर व्यापक प्रचार अभियान चलाया और स्थानीय स्तर पर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बूथ स्तर तक सक्रिय रहकर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।

 

वार्ड क्रमांक 12 में भी मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। भाजपा ने नए चेहरे छबीला नेताम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अनुभवी नेत्री सावित्री मरकाम पर भरोसा जताया है। दोनों प्रत्याशियों ने लगातार जनसंपर्क कर मतदाताओं से समर्थन मांगा और अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया।

 

स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में वार्ड क्रमांक 1 के मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ग का मतदान चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। यही कारण रहा कि दोनों प्रमुख दलों ने इस वर्ग तक अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए विशेष प्रयास किए।

 

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा। जिलाध्यक्ष रवि घोष ने भी लगातार वार्डों में जनसंपर्क कर मतदाताओं से समर्थन की अपील की। दूसरी ओर भाजपा ने स्थानीय विधायक, नगर पंचायत अध्यक्ष और संगठन के पदाधिकारियों के नेतृत्व में चुनाव अभियान को धार देने का प्रयास किया।

 

राजनीतिक जानकारों के अनुसार दोनों वार्डों में मुकाबला बेहद रोचक और करीबी दिखाई दे रहा है। चुनाव परिणाम को लेकर विभिन्न तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला मतदाता ही करेंगे। अब पूरे नगर की नजरें मतदान और मतगणना के बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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