
रायपुर/कोंडागाँव। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रही है। इसी कड़ी में कोंडागाँव जिले में लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला इथेनॉल प्लांट स्थापित किया गया है। यह परियोजना कृषि आधारित औद्योगिक विकास का नया मॉडल बनकर उभर रही है और इससे बस्तर संभाग की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह प्लांट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का बड़ा माध्यम बनेगा। कोंडागाँव प्रदेश का प्रमुख मक्का उत्पादक जिला है, जहां हर वर्ष बड़ी मात्रा में मक्का उत्पादन होता है। अब किसानों की उपज को स्थानीय स्तर पर ही मूल्य संवर्धन के जरिए सीधे उद्योग से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्लांट में प्रतिदिन लगभग 200 टन मक्का का प्रसंस्करण कर करीब 80 हजार लीटर इथेनॉल तैयार किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर के बाजारों और निजी व्यापारियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। किसानों को दोनों सीजन में उचित मूल्य पर खरीदी की सुविधा उपलब्ध होगी।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि “मां दंतेश्वरी मक्का प्रोसेसिंग इकाई” के माध्यम से खेती और उद्योग का सीधा समन्वय स्थापित किया जा रहा है। इस योजना से जिले के 46 हजार से अधिक मक्का उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। प्लांट संचालन में किसानों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। पंजीकृत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।
इस परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इथेनॉल निर्माण के बाद बचने वाले अवशेषों का उपयोग पशु आहार के रूप में किया जाएगा। इससे पशुपालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आर्थिक अवसर तैयार होंगे।
करीब 200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देने वाला यह प्लांट बस्तर संभाग में औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं भी पैदा करेगा। साथ ही प्लांट से होने वाले लाभ का एक हिस्सा किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में देने की व्यवस्था भी की गई है।
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें कृषि आधारित उद्योगों से जोड़कर आय के नए स्रोत उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कोंडागाँव का यह मॉडल आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।