CG News: वच और ब्राह्मी की खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर पैडी डायवर्सन मॉडल बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता की नई पहचान

धान की पारंपरिक खेती छोड़ औषधीय फसलों की ओर बढ़ रहे किसान, कम लागत में मिल रहा बेहतर मुनाफा केदार कश्यप बोले – तकनीकी सहयोग और सुनिश्चित बाजार से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था

छत्तीसगढ़ में धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अब किसान औषधीय खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित “पैडी डायवर्सन मॉडल” किसानों की आर्थिक स्थिति बदलने वाला सफल मॉडल बनकर उभरा है। वच और ब्राह्मी जैसी औषधीय फसलों ने अब किसानों की तकदीर बदलनी शुरू कर दी है।

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा शुरू की गई इस पहल से प्रदेश के कई जिलों के किसान लाभान्वित हो रहे हैं। योजना का उद्देश्य धान पर निर्भरता कम कर किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रेरित करना है, जिनसे कम लागत में अधिक मुनाफा मिल सके।

 

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार नवाचार आधारित मॉडल तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती केवल खेती का विकल्प नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है।

 

प्रदेश के धमतरी, नारायणपुर, कोण्डागांव, बस्तर और रायपुर जिले के 23 गांवों के 147 किसानों ने अब तक 65 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती अपनाई है। इनमें 63 किसानों ने 39 एकड़ में वच की खेती की है, जबकि 84 किसानों ने 26 एकड़ क्षेत्र में ब्राह्मी का उत्पादन किया है।

 

सबसे अधिक बदलाव धमतरी जिले में देखने को मिला है, जहां 16 गांवों के 90 किसानों ने 27.5 एकड़ भूमि पर औषधीय खेती कर बेहतर आय अर्जित की है। वहीं रायपुर जिले के 35 किसानों ने 11.5 एकड़ क्षेत्र में औषधीय फसलें उगाकर उल्लेखनीय लाभ प्राप्त किया है।

 

सरकार और औषधि पादप बोर्ड द्वारा किसानों को नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण, सफल किसानों के खेतों का अध्ययन भ्रमण और उत्पादों की खरीदी के लिए बाजार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इससे किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग मिल रहा है।

 

बोर्ड के अनुसार एक एकड़ में वच और ब्राह्मी की खेती में लगभग 20 हजार रुपये की लागत आती है, जबकि किसानों को एक वर्ष में करीब एक लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। कम लागत और अधिक मुनाफे ने किसानों का रुझान तेजी से औषधीय खेती की ओर बढ़ाया है।

 

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार किसानों को केवल सहायता नहीं बल्कि स्थायी आय का मजबूत मॉडल देना चाहती है। सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और सुनिश्चित बाजार मिलने से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। आज पैडी डायवर्सन मॉडल से जुड़े किसान आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि की नई पहचान बनते जा रहे हैं।

 

दंडकारण्य दर्पण की नजर में यह मॉडल केवल खेती में बदलाव नहीं बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में आर्थिक सशक्तिकरण की नई दिशा है, जो आने वाले समय में प्रदेश के हजारों किसानों के लिए उम्मीद की नई राह खोल सकता है।

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