
रायपुर। मुख्यमंत्री के नेतृत्व और वन मंत्री के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2026 के तेन्दूपत्ता संग्रहण अभियान में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 24 मई तक राज्य में कुल 13 लाख 52 हजार 248.343 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया, जिसे वनांचल की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।
तेन्दूपत्ता, जिसे वनांचल में “हरा सोना” कहा जाता है, आज लाखों वनवासियों और आदिवासी परिवारों की आर्थिक ताकत बनकर उभरा है। राज्य सरकार द्वारा प्रति मानक बोरा 5500 रुपये संग्रहण दर तय किए जाने से संग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है और करोड़ों रुपये की राशि सीधे उनके खातों में पहुंच रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता वनांचल में रहने वाले आदिवासी और वनाश्रित परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता संग्रहण केवल वनोपज गतिविधि नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, सम्मान और आत्मनिर्भरता से जुड़ा अभियान है।
राज्यभर में 900 से अधिक प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से 13 लाख से अधिक संग्राहक इस अभियान से जुड़े हुए हैं। संग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए समय पर भुगतान, बोनस और न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
बिलासपुर वृत रहा सबसे आगे
तेन्दूपत्ता संग्रहण में बिलासपुर वृत ने राज्य में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 3 लाख 03 हजार 191.770 मानक बोरा संग्रहण दर्ज किया। रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर और मरवाही क्षेत्रों के संग्राहकों ने इसमें महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सरगुजा वृत ने भी दिखाई मजबूती
सरगुजा वृत में 2 लाख 98 हजार 200.456 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया। बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, सरगुजा और जशपुर क्षेत्रों में संग्रहण कार्य उल्लेखनीय रहा।
कांकेर, रायपुर और बस्तर संभाग का अहम योगदान
कांकेर वृत में 2 लाख 24 हजार 817.540 मानक बोरा तथा रायपुर वृत में 1 लाख 92 हजार 088.675 मानक बोरा संग्रहित किया गया। वहीं जगदलपुर वृत में 1 लाख 74 हजार 392.028 मानक बोरा संग्रहण दर्ज हुआ, जिसमें सुकमा और बीजापुर जिलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
दुर्ग वृत में भी सफल रहा अभियान
दुर्ग वृत में 1 लाख 59 हजार 557.874 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया। राजनांदगांव, कवर्धा, खैरागढ़ और बालोद क्षेत्रों के संग्राहकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। तेन्दूपत्ता संग्रहण से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और वनांचल के परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।