
अबूझमाड़ की सुंदरता को मिलेगी दुनिया में नई पहचान
वन मंत्री केदार कश्यप ने लिया संज्ञान, पर्यटन विकास की खुली नई राह
प्रधान- संपादक
नारायणपुर। अबूझमाड़ की अनछुई प्राकृतिक सुंदरता अब धीरे-धीरे दुनिया के सामने आने लगी है। घने जंगल, विशाल नदियां, पहाड़, झरने और प्राकृतिक झीलों से घिरा नारायणपुर जिले का बालेबेड़ा और कदेर क्षेत्र अब पर्यटन की नई संभावनाओं के केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। दंडकारण्य दर्पण द्वारा हाल ही में प्रकाशित विशेष खबर में इस क्षेत्र की अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती को प्रमुखता से सामने लाया गया था। खबर में बताया गया था कि छत्तीसगढ़ के सबसे सुंदर वन क्षेत्रों में शामिल यह इलाका लंबे समय तक नक्सली दहशत के कारण लोगों की पहुंच से दूर और लगभग अनछुआ बना रहा।
अब इस खबर का संज्ञान लेते हुए वन मंत्री Kedar Kashyap ने क्षेत्र की प्राकृतिक क्षमता को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में विचार शुरू किया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बालेबेड़ा और कदेर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर कार्य किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अबूझमाड़ केवल जंगलों का क्षेत्र नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत और आदिवासी संस्कृति का जीवंत केंद्र है। यहां की नदियां, शांत झीलें, पहाड़ी घाटियां और घने वन आज भी अपनी मूल प्राकृतिक अवस्था में मौजूद हैं। लंबे समय तक सुरक्षा कारणों और नक्सली प्रभाव के चलते यह क्षेत्र बाहरी दुनिया से लगभग कटा हुआ था, जिसके कारण इसकी खूबसूरती लोगों तक नहीं पहुंच पाई।
नक्सल प्रभाव कम होने और क्षेत्र में शांति का वातावरण बनने के बाद अब विकास और पर्यटन की नई उम्मीद दिखाई देने लगी है। यदि इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन से जोड़ा जाता है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ स्थानीय आदिवासी समुदायों और नारायणपुर जिले को मिलेगा। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होटल, होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन, गाइड सेवा और परिवहन जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक संतुलन और आदिवासी संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन विकसित किया जाए, तो अबूझमाड़ देश और दुनिया के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है। इससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर हो सकेगा।
वन मंत्री केदार कश्यप ने भी संकेत दिए हैं कि सरकार प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित रखते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। उनका मानना है कि अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में पर्यटन विकास केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, जंगल और प्रकृति को वैश्विक पहचान दिलाने का माध्यम भी बन सकता है।
नारायणपुर जिले के लोगों में इस पहल को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि वर्षों तक संघर्ष और भय की पहचान रहे अबूझमाड़ को अब विकास, शांति और प्राकृतिक पर्यटन की नई पहचान मिल सकती है। दंडकारण्य दर्पण द्वारा उठाया गया यह मुद्दा अब पूरे क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं की उम्मीद बनता नजर आ रहा है।