
रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र इस बार नारी सशक्तिकरण के नाम रहा, जहां महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शासकीय संकल्प पेश करते हुए संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया पूरी होते ही तत्काल लागू करने की मांग रखी। सरकार ने इसे नारी सम्मान, समान भागीदारी और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
विधानसभा की दर्शक दीर्घा में महिला शक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिली। प्रदेशभर से निगम, पालिका, जिला पंचायत और जनपद पंचायतों की करीब 500 महिला जनप्रतिनिधि मौजूद रहीं, वहीं बड़ी संख्या में आम महिलाएं भी कार्यवाही देखने पहुंचीं। यह दृश्य महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी और जागरूकता का स्पष्ट संकेत था।
चर्चा की शुरुआत विधायक लता उसेंडी ने की, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने अपने-अपने विचार रखे। बहस के दौरान भाजपा और कांग्रेस के सदस्यों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। महिला विधायकों ने इस मुद्दे पर मुखर होकर अपनी बात रखी। जहां भाजपा की महिला विधायकों ने बिल के समर्थन में तर्क दिए, वहीं विपक्ष की महिला विधायकों ने परिसीमन के साथ आरक्षण लागू करने के प्रावधान पर सवाल उठाए।
विपक्ष के नेता डॉ चरणदास महंत ने अशासकीय संकल्प प्रस्तुत करते हुए वर्तमान सदस्य संख्या के आधार पर विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा में तत्काल 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की। हालांकि, आसंदी ने इस प्रस्ताव को अग्राह्य कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक सहमति तो है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के तरीके और समय-सीमा को लेकर मतभेद बने हुए हैं। सदन के भीतर जहां गंभीर बहस हुई, वहीं बाहर महिलाओं में इस मुद्दे को लेकर उत्साह और उम्मीद दोनों देखने को मिली।
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