CG News: “डर से विकास तक”;जाटलूर में उम्मीदों का नया साप्ताहिक बाजार

“डर से विकास तक”;जाटलूर में उम्मीदों का नया साप्ताहिक बाजार

 

नारायणपुर, 28 अपै्रल 2026// नारायणपुर जिले के घने जंगलों के बीच बसा अबुझमाड़ कभी डर और अनिश्चितता का पर्याय था। यहां की खामोशी में अक्सर बंदूकों की आवाज गूंजती थी, और लोगों का जीवन भय के साये में सिमटकर रह गया था। लेकिन वक्त ने करवट लीकृऔर आज वही इलाका एक नई कहानी लिख रहा है।

कलेक्टर नम्रता जैन के भ्रमण के दौरान ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर बाजार लगाने की मांग रखी थी। कलेक्टर ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ही साप्ताहिक बाजार शुरू कराने का आश्वासन दिया था। ओरछा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम जाटलूर में अब हर शनिवार साप्ताहिक हाट बाजार लगने लगा है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। प्रशासन की पहल के बाद अब जाटलूर में नियमित रूप से शनिवार को हाट बाजार सजने लगा है। जहां पहले सन्नाटा पसरा रहता था, वहां अब बाजार की चहल-पहल देखने को मिल रही है। आसपास के गांवों से ग्रामीण यहां पहुंचकर अपनी जरूरत का सामान खरीद रहे हैं।

बाजार में रंग-बिरंगी दुकानों के साथ ताजी सब्जियां, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध हो रहे हैं। इस पहल से न केवल ग्रामीणों को दूर मुख्यालय जाने से राहत मिली है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।कुछ समय पहले तक आसपास के आठ गांवों के करीब 75 परिवारों को अपने जरूरी सामान के लिए दूर मुख्यालय तक जाना पड़ता था। सफर लंबा था, रास्ता मुश्किल और खतरे से भरा। लेकिन अब जाटलूर में ही बाजार लगने से उनकी जिंदगी आसान हो गई है। करीब 320 ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बदलाव की शुरुआत है।

इस परिवर्तन की नींव बने हैं सरकार द्वारा स्थापित नए पुलिस कैंप। इन कैंपों ने केवल सुरक्षा ही नहीं दी, बल्कि लोगों के मन से डर को भी दूर किया। जहां पहले लोग घरों से निकलने में हिचकते थे, अब वहीं वे खुले मन से व्यापार कर रहे हैं, आपस में मिल रहे हैं और भविष्य के सपने देख रहे हैं।

धीरे-धीरे सरकारी योजनाएं भी इन दूरस्थ गांवों तक पहुंचने लगी हैं। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी सुविधाएं अब लोगों के जीवन को बदल रही हैं। जाटलूर का यह छोटा-सा बाजार इस बात का प्रतीक बन गया है कि जब सुरक्षा और विकास साथ चलते हैं, तो सबसे दूर और चुनौतीपूर्ण इलाके भी नई उम्मीदों से जगमगा उठते हैं।

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