
नारायणपुर, 25 अप्रैल 2026:
नारायणपुर जिले के सुदूर ब्रेहबेड़ा गांव की दो वर्षीय पारूल दुग्गा अब स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है। कुछ समय पहले तक यह मासूम बच्ची जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। परिवार को उसकी बीमारी का कारण भी पता नहीं था, लेकिन जिले में शुरू किए गए प्रोजेक्ट धड़कन ने समय रहते उसकी गंभीर हृदय समस्या की पहचान कर उसे नया जीवन दे दिया।
फरवरी 2026 में शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच करना है, ताकि गंभीर बीमारियों का समय रहते इलाज हो सके। यह पहल खास तौर पर उन दूरस्थ क्षेत्रों के लिए शुरू की गई है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं।
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर बच्चों की जांच की। पहले चरण में तीन हजार से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, जिसमें तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले। इनमें पारूल दुग्गा भी शामिल थी।
जब परिवार को बच्ची की बीमारी के बारे में जानकारी मिली, तो चिंता बढ़ गई, लेकिन प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था कर उम्मीद भी जगाई। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर भेजा और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
रायपुर पहुंचने पर श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पारूल की जांच की, जिसमें उसके हृदय में गंभीर समस्या पाई गई। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी, जिसके बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से उपचार की पूरी प्रक्रिया शुरू की गई।
10 अप्रैल 2026 को अस्पताल में पारूल की सफल हृदय सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उसकी देखभाल की गई और अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुकी है। पारूल अब फिर से खेल रही है, मुस्कुरा रही है और परिवार के लिए खुशियों का कारण बन गई है।
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि प्रोजेक्ट धड़कन का उद्देश्य केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि जिले के दूरस्थ इलाकों में रहने वाले बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की जांच कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
पारूल की यह कहानी केवल एक सफल ऑपरेशन की नहीं, बल्कि उस बदलाव की कहानी है, जहां दूरस्थ गांवों तक भी संवेदनशील शासन की पहुंच बन रही है। प्रोजेक्ट धड़कन अब नारायणपुर के कई परिवारों के लिए उम्मीद का प्रतीक बन चुका है, जहां हर बच्चे की धड़कन को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।