
दंडकारण्य दर्पण बड़ी खबर
छत्तीसगढ़ में 9 लाख किसान बिना फार्मर आईडी, खरीफ से पहले बढ़ी चिंता
नई डिजिटल व्यवस्था से होगा खाद वितरण, बिना आईडी नहीं मिलेगा लाभ
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन से पहले किसानों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में करीब 9 लाख किसान ऐसे हैं जिनके पास अभी तक फार्मर आईडी नहीं है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन किसानों को खाद मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में कुल 40 लाख 89 हजार 908 किसान पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 31 लाख 68 हजार किसानों के पास ही फार्मर आईडी उपलब्ध है। यानी बड़ी संख्या में किसान अभी इस डिजिटल सिस्टम से बाहर हैं।
डिजिटल सिस्टम से होगा खाद वितरण
सरकार ने खाद वितरण को पारदर्शी बनाने और सही किसानों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब खाद वितरण फार्मर आईडी के जरिए किया जाएगा।
योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं किसान
जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं होगी, वे न सिर्फ खाद लेने में दिक्कत झेलेंगे, बल्कि कई सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह सकते हैं। ऐसे में किसानों के लिए जल्द से जल्द आईडी बनवाना जरूरी हो गया है।
खरीफ 2026-27 से आईडी होगी अनिवार्य
सरकार की तैयारी है कि खरीफ सीजन 2026-27 से फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया जाए। इससे पहले किसानों को जागरूक करने और पंजीयन प्रक्रिया तेज करने पर जोर दिया जा रहा है।
बीज दरें भी हुईं तय, किसानों के लिए तैयारी तेज
खरीफ सीजन को देखते हुए राज्य में बीज वितरण को लेकर भी तैयारी तेज हो गई है। बीज निगम ने प्रमाणित बीजों की नई दरें जारी कर दी हैं।
कई फसलों के बीज शामिल
नई दरों में अनाज, दलहन और तिलहन फसलों के बीज शामिल हैं। इनमें उड़द, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और ज्वार जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं।
समिति ने दी मंजूरी
राज्य स्तरीय बीज विक्रय दर निर्धारण समिति की बैठक में इन दरों को मंजूरी दी गई है। बीजों की कीमत किस्म और अवधि के आधार पर अलग-अलग तय की गई है।
किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने की तैयारी
सरकार का उद्देश्य है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही किसानों को पर्याप्त मात्रा में प्रमाणित बीज उपलब्ध करा दिए जाएं, ताकि खेती की तैयारी समय पर पूरी हो सके।
किसानों के लिए अहम समय
एक ओर जहां फार्मर आईडी अनिवार्यता की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास भी तेज हो गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए यह समय तैयारी और सतर्कता दोनों का है।