“National News” : महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: लोकसभा में नहीं मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में गरमाई राजनीति

 महिला आरक्षण बिल पर सियासी संग्राम: लोकसभा में नहीं मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में गरमाई राजनीति

रायपुर। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास नहीं होने के बाद देशभर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है, जिसका असर छत्तीसगढ़ में भी साफ देखने को मिल रहा है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

बीजेपी ने इस विषय पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि बीते 78 वर्षों में महिला सशक्तिकरण केवल भाषणों तक ही सीमित रहा। बीजेपी ने दावा किया कि देश में महिलाओं को वास्तविक अधिकार देने की दिशा में ठोस पहल प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही संभव हो पाई है।

बीजेपी ने आगे कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” लाकर महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त करने का ऐतिहासिक प्रयास किया गया, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने इसे संकीर्ण राजनीति का शिकार बना दिया। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष की राजनीति के कारण ही यह महत्वपूर्ण बिल लोकसभा में पारित नहीं हो सका, जिससे देश की करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है..।

वहीं, कांग्रेस ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है, बल्कि उनकी सरकार के समय से ही इस पर पहल की जाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है, जबकि असलियत में महिलाओं को तत्काल आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है..।

छत्तीसगढ़ में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी जहां इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जोड़कर देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे बीजेपी की राजनीतिक रणनीति बता रही है। प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस विषय पर लगातार चर्चा जारी है और दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं..।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। देश की लगभग 70 करोड़ महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए इस तरह के विधेयकों का पारित होना बेहद जरूरी माना जा रहा है..।

फिलहाल, लोकसभा में बिल पास न होने के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक दल किस तरह से अपनी रणनीति तय करते हैं और महिलाओं के हित में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं..

Exit mobile version