Chhattisgarh: बायोनिक हाथ से बदली जिंदगी: नारायणपुर के तीन दिव्यांगजन बने आत्मनिर्भर

बायोनिक हाथ से बदली जिंदगी: नारायणपुर के तीन दिव्यांगजन बने आत्मनिर्भर

 

नारायणपुर, छत्तीसगढ़:

बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर में आधुनिक तकनीक ने तीन दिव्यांगजनों की जिंदगी बदल दी है। बायोनिक हाथ मिलने के बाद अब वे धीरे-धीरे अपने रोजमर्रा के काम खुद करने लगे हैं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

 

नारायणपुर जिले के छोटे से गांव बावड़ी के रहने वाले जमदेर पोटाई कई वर्षों से एक हाथ के बिना जीवन जी रहे थे। खेत में काम करना, घर के सामान्य काम करना या लोगों के बीच आत्मविश्वास के साथ खड़ा होना—हर काम उनके लिए चुनौती बन गया था।

 

इसी तरह गरांजी के सुनिल कुमार और नयापारा के जयचंद भी शारीरिक कमी के कारण कई बार दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर थे। हालांकि तीनों की इच्छा थी कि वे अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनें और सामान्य लोगों की तरह काम कर सकें।

 

रायपुर में लगा विशेष शिविर

 

फरवरी में समाज कल्याण विभाग और इनाली फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में रायपुर में 20 से 23 फरवरी तक विशेष शिविर आयोजित किया गया। शिविर की जानकारी मिलने के बाद इन तीनों दिव्यांगजनों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी।

 

शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनका परीक्षण किया और बायोनिक हाथ लगाने के लिए सटीक माप लिया।

 

तकनीक ने दी नई शुरुआत

 

कुछ समय बाद वह पल भी आया जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। विशेषज्ञों ने तीनों दिव्यांगजनों को आधुनिक तकनीक से बने बायोनिक हाथ पहनाए। हाथ लगते ही उनके चेहरों पर मुस्कान लौट आई।

 

अब वे धीरे-धीरे अपने कई काम खुद करने लगे हैं।

 

जमदेर पोटाई, सुनिल कुमार और जयचंद कहते हैं कि बायोनिक हाथ उनके लिए नई जिंदगी की तरह है। उन्होंने इसके लिए शासन, समाज कल्याण विभाग और इनाली फाउंडेशन का आभार जताया।

आत्मनिर्भरता का संदेश

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पहल केवल तीन लोगों की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही सहयोग और तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजन भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में सम्मान के साथ जीवन जी सकते हैं।

 

 

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