
अबूझमाड़ में सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष ने कलेक्टर से की शिकायत
नारायणपुर के नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में टेकानार से कस्तूरमेटा तक बन रही सड़क और पुलिया के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। यह सड़क प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनाई जा रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही है और मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा। मामले ने तूल तब पकड़ा जब जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम स्वयं निर्माण स्थल पर निरीक्षण के लिए पहुंचे।
क्या हैं आरोप?
जिला पंचायत अध्यक्ष का कहना है कि सड़क निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल की जा रही है और तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। उनके मुताबिक, कई जगहों पर सड़क की मोटाई निर्धारित मानक से कम पाई गई, जबकि पुलिया निर्माण में भी गुणवत्ता संबंधी खामियां देखी गईं।
उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से काम किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं की गई तो भविष्य में सड़क क्षतिग्रस्त हो सकती है और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कलेक्टर से की शिकायत
निरीक्षण के बाद नारायण मरकाम ने जिला कलेक्टर नम्रता जैन से औपचारिक शिकायत की है। उन्होंने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि गड़बड़ी पाई जाए तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सड़क निर्माण विकास की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि गुणवत्ता से समझौता किया जाता है तो इसका सीधा असर स्थानीय लोगों पर पड़ेगा।
योजना का उद्देश्य
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का उद्देश्य दूरदराज़ और ग्रामीण इलाकों को सर्व-ऋतु सड़क संपर्क से जोड़ना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान हो सके। अबूझमाड़ क्षेत्र लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता रहा है। ऐसे में सड़क निर्माण को विकास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि सड़क का निर्माण टिकाऊ और गुणवत्ता के साथ हो, ताकि आने वाले वर्षों तक उन्हें बेहतर आवागमन सुविधा मिल सके।
अब देखना होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों का समाधान हो पाता है।