
हल्बा जनजाति: इतिहास एवं संस्कृति के कवर पेज का रायपुर में अनावरण
रायपुर: छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं और इतिहास पर केंद्रित पुस्तक ‘हल्बा जनजाति: इतिहास एवं संस्कृति’ के कवर पेज का अनावरण शुक्रवार को रायपुर में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में किया गया।
यह आयोजन सरस्वती प्रकाशन भिलाई और साईंनाथ फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में हुए ‘सरस्वती साहित्य महोत्सव’ के दौरान हुआ। कार्यक्रम शांति नगर स्थित विमतारा ऑडोटोरियम में आयोजित किया गया था।
किन-किन हस्तियों ने किया अनावरण
नारायणपुर जिले के अबुझमाड़ अंचल के लोक साहित्यकार डॉ. भागेश्वर पात्र द्वारा लिखित इस पुस्तक के कवर पेज का अनावरण छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्र, छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी की अध्यक्ष श्रीमती नजमा अजीम खान और वरिष्ठ साहित्यकार नर्मदा प्रसाद मिश्र के करकमलों से किया गया।
समारोह में नारायणपुर के साहित्यकार शिवकुमार पाण्डेय ने बस्तर के जनजातीय इतिहास और संस्कृति पर अपने शोधकार्य को साझा किया। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्रीय साहित्य और लोक परंपराओं का दस्तावेजीकरण समय की आवश्यकता है।
‘महत्वपूर्ण दस्तावेज’ मानी जा रही पुस्तक
विशेषज्ञों के अनुसार डॉ. पात्र की यह पुस्तक आंचलिक साहित्य पर आधारित एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है, जिसमें हल्बा जनजाति के इतिहास, सामाजिक संरचना, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को समग्र रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
आयोजकों ने बताया कि पुस्तक प्रकाशन के बाद शीघ्र ही पाठकों के लिए उपलब्ध होगी।
सम्मान और शुभकामनाएं
महोत्सव में बस्तर संभाग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इसी अवसर पर रूद्रनारायण पाणिग्राही को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘सरस्वती साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
पुस्तक के कवर पेज के अनावरण पर अखिल भारतीय हल्बा आदिवासी समाज के राष्ट्रीय पदाधिकारी लतेलराम नाईक, शिवकुमार पात्र सहित विक्रम सोनी, नंदकुमार प्रधान, शर्मा शांडिल्य, अरुण बघेल, महेश्वर मुरला, ललित नरेटी, तमेश कुमार चिराम और ईश्वर भंडारी समेत कई शुभचिंतकों ने लेखक को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।