
नारायणपुर (छत्तीसगढ़) — जिले की खदानों से प्राप्त जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि को कांकेर जिले को स्थानांतरित किए जाने के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने सात दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन और शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि जिन खदानों से राजस्व प्राप्त हो रहा है, वे नारायणपुर जिले की सीमा में स्थित हैं। इसलिए इस राशि पर पहला अधिकार स्थानीय जनता का है। प्रतिनिधियों का तर्क है कि डीएमएफ का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है, ऐसे में राशि का दूसरे जिले में हस्तांतरण “अनुचित और नियमों के विरुद्ध” है।
ज्ञापन में अंजरेल खदान का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कुल खनन क्षेत्र में लगभग 1203.152 हेक्टेयर भूमि नारायणपुर जिले में आती है, जबकि 825.645 हेक्टेयर क्षेत्र कांकेर जिले में है। प्रतिनिधियों के अनुसार, कांकेर क्षेत्र में अब तक खनन कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, इसके बावजूद रावघाट परियोजना से डीएमएफ मद में लगभग 58 करोड़ रुपये कांकेर जिले को प्रदान किए गए, जबकि नारायणपुर को करीब 15 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
रावघाट परियोजना का संबंध से है, जो के अंतर्गत संचालित है। ज्ञापन में मांग की गई है कि खनिपट्टा अनुबंध का निष्पादन नारायणपुर जिले से किया जाए और अब तक की संपूर्ण डीएमएफ राशि का तत्काल अंतरण सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जिले के निवासी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना, प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे, साथ ही खनन कार्य को बाधित करने के लिए भी बाध्य हो सकते हैं।
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नारायणपुर (छत्तीसगढ़) — जिले की खदानों से प्राप्त जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) की राशि को कांकेर जिले को स्थानांतरित किए जाने के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। प्रतिनिधिमंडल ने सात दिनों के भीतर मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन और शांतिपूर्ण आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि जिन खदानों से राजस्व प्राप्त हो रहा है, वे नारायणपुर जिले की सीमा में स्थित हैं। इसलिए इस राशि पर पहला अधिकार स्थानीय जनता का है। प्रतिनिधियों का तर्क है कि डीएमएफ का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करना है, ऐसे में राशि का दूसरे जिले में हस्तांतरण “अनुचित और नियमों के विरुद्ध” है।
ज्ञापन में अंजरेल खदान का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कुल खनन क्षेत्र में लगभग 1203.152 हेक्टेयर भूमि नारायणपुर जिले में आती है, जबकि 825.645 हेक्टेयर क्षेत्र कांकेर जिले में है। प्रतिनिधियों के अनुसार, कांकेर क्षेत्र में अब तक खनन कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, इसके बावजूद रावघाट परियोजना से डीएमएफ मद में लगभग 58 करोड़ रुपये कांकेर जिले को प्रदान किए गए, जबकि नारायणपुर को करीब 15 करोड़ रुपये ही मिले हैं।
रावघाट परियोजना का संबंध भिलाई स्टील प्लांट से है, जो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत संचालित है। ज्ञापन में मांग की गई है कि खनिपट्टा अनुबंध का निष्पादन नारायणपुर जिले से किया जाए और अब तक की संपूर्ण डीएमएफ राशि का तत्काल अंतरण सुनिश्चित किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जिले के निवासी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से धरना, प्रदर्शन और आंदोलन करेंगे, साथ ही खनन कार्य को बाधित करने के लिए भी बाध्य हो सकते हैं।
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।