
रायपुर, 18 फरवरी 2026 — छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्व व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने बुधवार को अपने निवास कार्यालय में ‘डिजिटल किसान किताब’ और ‘डिजिटल ऋण पुस्तिका’ की औपचारिक शुरुआत की।
इस मौके पर ‘छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली’ (भाग 1 से 4) पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसे उमेश कुमार पटेल और श्रीकांत वर्मा ने लिखा है। कार्यक्रम में संचालक भू-अभिलेख विनीत नन्दनवार सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है डिजिटल किसान किताब?
सरकार के मुताबिक, डिजिटल किसान किताब पारंपरिक मैन्युअल किसान किताब की जगह लेगी। इसके जरिए किसान अपनी भूमि से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन देख और डाउनलोड कर सकेंगे। यह सुविधा राज्य के ‘भुइया’ पोर्टल पर B-1 और P-II रिपोर्ट के साथ उपलब्ध होगी।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली में भूमि संबंधी विवरण स्वतः अपडेट होते रहेंगे। इससे संशोधन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। पटवारी द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे दस्तावेज़ों की वैधता सुनिश्चित होगी।
किसानों को क्या फायदा?
कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि डिजिटल ऋण पुस्तिका सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि यह राजस्व व्यवस्था को नागरिक-केन्द्रित बनाने की दिशा में ठोस पहल है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है और बड़ी संख्या में किसान भूमि पर निर्भर हैं। ऋण पुस्तिका की जानकारी ऑनलाइन और रियल टाइम उपलब्ध होने से किसानों को बैंक ऋण, फसल ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी।
सरकार का दावा है कि डिजिटल प्रणाली से त्रुटियों में कमी आएगी और अभिलेखों की शुद्धता बढ़ेगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बनेगी।
‘डिजिटल छत्तीसगढ़’ की दिशा में कदम
मंत्री ने कहा कि यह पहल ‘डिजिटल छत्तीसगढ़’ की अवधारणा को मजबूत करेगी और शासन व नागरिकों के बीच विश्वास बढ़ाएगी। उन्होंने राजस्व विभाग, एनआईसी और परियोजना से जुड़े तकनीकी दल को बधाई दी और नागरिकों से डिजिटल सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने की अपील की।
राज्य सरकार के अनुसार, डिजिटल किसान किताब और डिजिटल ऋण पुस्तिका की शुरुआत राजस्व सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।