Chhattisgarh: बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है- केदार कश्यप

बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है- केदार कश्यप

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और गृह मंत्री अमित शाह जी के आगमन पर बस्तर पण्डुम-2026 में झलकेगी जनजातीय संस्कृति की वैश्विक छटा

 

बस्तर पण्डुम- 2026: 55 हजार से अधिक कलाकारों की भागीदारी, जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगेगा बस्तर

 

नक्सल हिंसा से संस्कृति के शिखर तक: बस्तर पण्डुम-2026 बना नए बस्तर के उदय का प्रतीक

 

 

जहाँ कभी गोलियों की गूंज थी, आज वहां ढोल-नगाड़े: बस्तर पण्डुम में दिखा बदलता बस्तर

 

राष्ट्रपति के आगमन से लेकर 55 हजार कलाकारों तक: बस्तर पण्डुम ने दिया शांति और विकास का संदेश

 

संस्कृति के मंच से नक्सलवाद को चुनौती: बस्तर पण्डुम-2026 में उमड़ेगा जनसमर्थन

छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर में चल रहे ‘बस्तर पण्डुम-2026’ कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में 7 फरवरी को बस्तर में आगमन हो रहा है। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। आगामी 7 से 9 फरवरी तक आयोजित होने वाले संभागस्तरीय बस्तर पण्डुम 2026 को लेकर अंचल के निवासियों में उत्साह देखने को मिल रहा है। समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे।

 

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर पण्डुम में 12 पारंपरिक विधाओं (नृत्य, संगीत, शिल्प) के माध्यम से आदिवासी विरासत का प्रदर्शन हो रहा है। जनपद, जिला और संभाग स्तर पर तीन चरणों में आयोजित इस कार्यक्रम में 12 प्रमुख विधाओं में बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन, और वन-औषधि शामिल हैं। श्री कश्यप ने कहा कि यह आयोजन बस्तर की आत्मा और सामुदायिक जीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित करता है। बस्तर पंडुम का उद्देश्य स्थानीय लोक संस्कृति को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। बस्तर पण्डुम का यह साफ संदेश है कि बस्तर की संस्कृति आज भी जीवित है और गर्व के साथ खड़ी है। यह आयोजन जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। श्री कश्यप ने कहा कि बस्तर की जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को दुनिया में वैश्विक पहचान मिली है। बस्तर पण्डुम में लोगों की स्वस्फूर्त भागीदारी इस बात का साफ संकेत है कि बस्तर की तरुणाई अब नक्सली आतंक की अंधेरी सुरंगों से बाहर निकलकर विकास, शांति और सुरक्षा के निर्भीक वातावरण में नए सूर्योदय के आलोक में अपना भविष्य गढ़ने के लिए तत्पर है।

 

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने बताया कि आँकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा सातों जिलों में तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है। प्रतिभागियों की संख्या में वृद्धि से स्पष्ट है कि बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने उत्साहित हैं! दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों से भी हजारों की संख्या में प्रतिभागी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला का जादू बिखरेंगे। श्री कश्यप ने कहा कि इन तीन दिनों में बस्तर की फिजाँ में जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज, स्थानीय व्यंजन पेय पदार्थ और नाटकों का मंचन आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा। इसमें 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक सहित अन्य विधा में हुनर दिखाएंगे। एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू से माहौल को सराबोर करेंगे।

 

प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाले 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है। इनमें 340 महिलाएँ और 365 पुरुष प्रतिभागी शामिल हैं। श्री कश्यप ने कहा कि यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहां की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर, बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता ओर जन भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन बनने की ओर अग्रसर है।

 

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