Chhattisgarh: गोमे पंचायत का आश्रित ग्राम कसोड आज भी अंधेरे और उपेक्षा में बीजेपी सरकार की जनविरोधी नीतियों का जीवंत उदाहरण – नरेन्द्र नाग अध्यक्ष बस्तर लोकसभा आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़

 

 

गोमे पंचायत का आश्रित ग्राम कसोड आज भी अंधेरे और उपेक्षा में बीजेपी सरकार की जनविरोधी नीतियों का जीवंत उदाहरण – नरेन्द्र नाग अध्यक्ष बस्तर लोकसभा आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़

आज आम आदमी पार्टी के बस्तर लोकसभा अध्यक्ष नरेन्द्र नाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की नारायणपुर जिले के अंतिम छोर पर बसे कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा से लगे गोमे पंचायत के आश्रित ग्राम कसोड की स्थिति ने एक बार फिर बीजेपी सरकार के विकास के खोखले दावों की पोल खोल दी है। आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी कसोड के ग्रामीण पानी, बिजली, शिक्षा और पहचान जैसे बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं।

आम आदमी पार्टी, छत्तीसगढ़ के बस्तर लोकसभा अध्यक्ष नरेन्द्र नाग ने कहा कि कसोड गांव में अधिकांश लोगों के पास आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य शासकीय दस्तावेज तक नहीं हैं, जिससे वे न केवल सरकारी योजनाओं से बाहर हैं बल्कि उनके संवैधानिक अधिकार भी छीने जा रहे हैं। यह स्थिति सीधे-सीधे बीजेपी सरकार की असंवेदनशील और विफल नीतियों को दर्शाती है।

नरेन्द्र नाग ने तीखा हमला करते हुए कहा कि

“बीजेपी सरकार सिर्फ कागजों में विकास दिखाने में माहिर है। जमीन पर सच्चाई यह है कि आदिवासी अंचलों के गांव आज भी अंधेरे में हैं। कसोड गांव में न बिजली है, न पानी और न ही बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था। यह सरकार की शर्मनाक विफलता है।”

उन्होंने पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों और संबंधित विभागों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत स्तर पर मिलीभगत और लापरवाही के कारण वर्षों से ग्रामीणों को जानबूझकर उपेक्षित रखा गया, जबकि विकास कार्यों की राशि कागजों में खर्च दिखाई जा रही है।

“यदि पंचायत और विभागीय अधिकारी ईमानदारी से अपना दायित्व निभाते, तो कसोड के बच्चों को आज स्कूल से वंचित नहीं होना पड़ता। यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि आदिवासी समाज के भविष्य के साथ अपराध है।”

आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र—ग्राम कसोड में पानी व बिजली की व्यवस्था नहीं की गई,

दस्तावेज निर्माण हेतु विशेष शिविर नहीं लगाए गए,और जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधियों व अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई,तो पार्टी जनआंदोलन, जिला मुख्यालय घेराव और राज्यस्तरीय विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी।

बीजेपी सरकार को यह समझना होगा कि बस्तर और अबूझमाड़ कोई प्रयोगशाला नहीं, बल्कि यहां भी भारत के नागरिक रहते हैं।

 

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