
पूना मारगेम के तहत साउथ सब ज़ोनल ब्यूरो से जुड़े 52 माओवादी कैडरों ने मुख्यधारा का मार्ग चुना है। इन पर कुल ₹1.41 करोड़ का इनाम घोषित था। गोली-बारूद से नाता तोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की इस पहल का हम स्वागत करते हैं।
पिछले 48 घंटों में 81 नक्सलियों का आत्मसमर्पण इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हिंसा की विचारधारा अब दम तोड़ रही है। बस्तर में अब माओवादीयों की विकृत विचारधारा के साथ-साथ उसका सपोर्ट सिस्टम भी पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।*
“पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान की यह सफलता, सरकार की दृढ़ नीति, संवेदनशील दृष्टिकोण और विकास आधारित विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और अमित शाह जी के मार्गदर्शन में 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का संकल्प अब तेज़ी से अपने निर्णायक लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।