Chhattisgarh : लाल आतंक का गढ़ समाप्त , 33 लाख के इनामी- 10 नक्सलीयों ने हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण

संवाददाता- दीपक गोटा

 

लाल आतंक का गढ़ समाप्त , 33 लाख के इनामी- 10 नक्सलीयों ने हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में आज 10 माओवादियों ने हथियार के साथ किया आत्मसमर्पण यह सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों की कार्रवाई ने नक्सलवाद को समाप्ति पर ला खड़े कर दिया है नक्सलियों के सरेंडर का सिलसिला जारी है इसी कड़ी में शुक्रवार को 10 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है इनमें 6 महिला माओवादी भी शामिल हैं जिन पर 33 लाख रूपए का इनाम घोषित था इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस अधिकारी और समाज प्रमुखों की मौजूदगी रही

 

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में PLGA बटालियन नंबर 1 के प्लाटून कमांडर (CyPCM रैंक) दरबा डिवीजन के 2 एरिया कमेटी सदस्य PLGA मिलिट्री प्लाटून नंबर 26 के 1 PPCM सदस्य (ACM) PLGA मिलिट्री प्लाटून नंबर 31 के 1 PPCM सदस्य गोल्लापल्ली LOS के 2 सदस्य और 3 पार्टी सदस्य (PM) शामिल हैं

 

इन आत्मसमर्पित कैडरों ने हथियार भी बैठे है जिनमें 01 AK-47, 02 SLR राइफलें, 01 स्टेन गन, 01 BGL लॉन्चर भी सुरक्षा बलों के समक्ष विधिवत रूप से जमा किए हैं, जिन हथियारों को जमा करने पर कुल 08 लाख रूपए का इनाम घोषित था

 

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) सुन्दरराज पत्तिलिंगम ने कहा कि जिला सुकमा में 10 माओवादी कैडरों का पुनर्वास यह दर्शाता है कि हिंसक और जनविरोधी माओवादी विचारधारा का अंत अब निकट है

जिससे लोग,पूना मारगेम,पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल पर भरोसा जताते हुए शांति एवं गरिमा और स्थायी प्रगति का मार्ग चुन रहे हैं- इससे छत्तीसगढ़ शासन भारत सरकार और बस्तर पुलिस- स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बल-क्षेत्र में शांति स्थापित कर सकें और पुनर्वास सुनिश्चित करने और समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूर्णत प्रतिबद्ध की जा सकें

 

उन्होंने ये भी कहा कि पिछले 11 महीनों में कब तक बस्तर रेंज में 1514 से अधिक माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया और शेष माओवादी कैडर- जिनमें Politburo सदस्य देवजी-DKSZC सदस्य पाप्पा राव देवा (Barse Deva) तथा और अन्य शामिल हैं- नक्सलीयों के पास हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है

 

पुलिस अधीक्षक ने यह भी जानकारी दी कि सुकमा में आज की कार्रवाई के बाद वर्ष 2025 में जिले में कुल 263 माओवादी कैडर हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं

 

बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में सकारात्मक घटनाक्रम

 

यह घटनाक्रम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। सुरक्षा बलों और सरकार की पुनर्वास नीतियां प्रभावी साबित हो रही हैं जिससे माओवादी विचारधारा से जुड़े लोग भी अब मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं

 

पूना नारकोम(स्थानीय गोंडी बोली में नई भोर ) जैसी पहल लोगों को गरिमापूर्ण जीवन और स्थायी प्रगति का मार्ग चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भारत सरकार, बस्तर पुलिस और सुरक्षा बल शांति स्थापना- पुनर्वास और समावेशी विकास के लिए एकजुट होकर काम कर रहे हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांतिपूर्ण भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक कदम है

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