Chhattisgarh : आईपीएस किरण चव्हाण : की मजबूत प्लानिंग से सुरक्षाबल नक्सलियों की रीढ़ तोड़ने में कैसे सफलता हासिल की …. 

संवाददाता- दीपक गोटा

 

आईपीएस किरण चव्हाण : की मजबूत प्लानिंग से सुरक्षाबल नक्सलियों की रीढ़ तोड़ने में कैसे सफलता हासिल की …. 

छत्तीसगढ़  के सुकमा-बीजापुर सीमा क्षेत्र, जिसे दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का हिस्सा माना जाता था- वास्तव में भाकपा (माओवादी) के पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की बटालियन नंबर 1 का मुख्य गढ़ माना जाता था इसी इलाके पर टॉप मोस्ट नक्सली नेता हिड़मा का करीब 28 वर्षों तक दबदबा रहा जिसे -हिडमन्ना या संतोष के नाम से भी जाना जाता था) इस इलाके में गभग तीन दशकों तक भारी दबदबा रहा

 

सुकमा में नक्सलियों की रीढ़ तोड़ने में यहाँ के पुलिस अधीक्षक (SP) किरण जी चव्हाण (Kiran G Chavan) की साहसिक रणनीति बेहद काम आ रही है-उन्होंने 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है और इसके लिए एक व्यापक त्रि-स्तरीय रणनीति अपनाई है इन्होंने नक्सलियों की रीढ़ को तोड़ने में कैसे सफलता हासिल की है

 

सुकमा जैसे क्षेत्रों में जहां दशकों से प्रशासन की पहुंच मुश्किल थी और सरकारी योजनाओं को पहुंचाना जोखिम भरा काम था- वहाँ 10वें SP किरण चव्हाण ने पदभार संभालते ही माहौल बदलने का बीड़ा उठाया और अपनी नियुक्ति के साथ ही- उन दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता दी- जहाँ पहले प्रशासन की मौजूदगी लगभग न के बराबर थी- ताकि वहां विकास और सुरक्षा पहुंचाई जा सके

 

जिन्हें माओवादी अभेद्य किला माना जाता था वह पूवर्ती- टेकलगुड़ा- रायगुड-तुमलपाड़ और गोमगुड़ा जैसे एक दर्जन से ज्यादा कट्टर पीएलजीए क्षेत्रों में न केवल सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए- बल्कि सड़क- राशन- स्वास्थ्य- शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं की नियमित पहुंच सुनिश्चित की गई और सुरक्षाबलों ने इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत की है जिससे माओवादियों के प्रभाव को कम किया गया है

 

किरण चव्हाण ने एसपी के रूप में 30 महीने के कार्यकाल में सुरक्षाबलों के साथ मिलकर घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में 24 नए कैंप स्थापित किए, जिससे माओवादी संगठन की अभेद्य मानी जाने वाली सैन्य संरचना पर हमला हुआ- इन कैंपों के खुलने से नक्सलियों की गतिविधि कम हुई और उन्हें सुकमा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा- जिससे क्षेत्र में हालात बदलने लगे

 

इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप-सुकमा जिले का 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र अब माओवाद से मुक्त हो चुका है जिन इलाकों में कभी नक्सलियों का प्रभाव था -वहां अब सरकारी योजनाएं विकास कार्य और प्रशासन की मौजूदगी सुनिश्चित हो रही

 

वर्ष 2024 से अब तक 21 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं इसी अवधि में 587 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है- 68 माओवादी मारे गए हैं और 450 गिरफ्तार हुए हैं…..

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