National : RTO में दलालों का आतंक: भ्रष्टाचार उजागर करने पहुंचे दो राष्ट्रीय पत्रकारों पर हमला, पत्रकार ICU में भर्ती

संवाददाता – सीमा कोमरे 

इंदौर RTO में दलालों का आतंक: भ्रष्टाचार उजागर करने पहुँची न्यूज 24 की टीम पर हमला, रिपोर्टर व कैमरामैन बंधक बनाकर पिटाई

 

मध्य प्रदेश के इंदौर RTO में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलना पत्रकारों के लिए भारी पड़ गया। दलाली के नेटवर्क का सच सामने लाने पहुँची न्यूज 24 की टीम पर शुक्रवार को दलालों ने जानलेवा हमला कर दिया। रिपोर्टर हेमंत शर्मा और कैमरामैन राजा शर्मा को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। दोनों गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

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मिली जानकारी के अनुसार, न्यूज 24 के संवाददाता हेमंत शर्मा पिछले कई दिनों से वाहन रजिस्ट्रेशन और फिटनेस के नाम पर चल रही खुलेआम दलाली की पड़ताल कर रहे थे। शुक्रवार को भी वे इसी विषय पर एक बड़ी ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचे थे। लेकिन रिपोर्टिंग शुरू होते ही RTO परिसर में मौजूद दलालों ने अपने लगभग 50 से अधिक साथियों को मौके पर बुला लिया।

 

इसके बाद पत्रकारों को धमकाया गया, फिर उन्हें जबरन रोककर बंधक बनाया गया और मारपीट की गई। हमलावरों ने उनका कैमरा, माइक और मोबाइल भी छीन लिया।

 

अब बड़ा सवाल है कि सरकारी दफ्तर में दलाल इतने बेखौफ कैसे हो गए? RTO परिसर में मीडिया टीम पर हमला कोई साधारण घटना नहीं—क्या ये प्रशासनिक संरक्षण के बिना संभव है?

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घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है।

 

कांग्रेस का बयान

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में अब विपक्ष के बाद मीडिया को भी चुप कराने की कोशिश हो रही है।

“जो सवाल उठाता है, उसकी आवाज़ दबा दी जाती है। सच दिखाने वालों पर लाठी, भ्रष्टाचारियों को सुरक्षा—यही है शिवराज सरकार का मॉडल।”

उमंग सिंघार—नेता प्रतिपक्ष

उमंग सिंघार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“प्रदेश में सच दिखाना किसी युद्ध से कम नहीं। पत्रकार कलम चलाएँ तो भाजपा के गुंडे डंडे चलाते हैं। मीडिया पर हमला सीधा लोकतंत्र पर हमला है। RTO की लूट उजागर होते ही सरकार को चक्कर आने लगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा राज में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है और दलालों को खुली छूट मिली हुई है।

 

बड़ा सवाल अब भी वही—क्या RTO में दलालों के पीछे ‘सिस्टम’ खड़ा है?

 

इस घटना ने एक बार फिर RTO में फैले भ्रष्टाचार और दलाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि सरकारी दफ्तर में पत्रकार ही सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित रहेंगे?

 

 

 

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