
संवाददाता- दीपक गोटा
मक्का ,गेहूं और धान के मुकाबले ज्यादा फायदे कम लागत- ज्यादा कमाई वाली फसल होती है- मक्का फसल की सम्पूर्ण जानकारी
1. परिचय (परिचय) और मिट्टी की आवश्यकताएँ
मक्का दुनिया की महत्वपूर्ण फसलों में से एक है, जिसका उपयोग अनाज- पशु आहार और औद्योगिक उत्पादों (जैसे इथेनॉल- स्टार्च) के लिए होता है। इसे रबी खरीफ और जायद—तीनों मौसमों में उगाया जा सकता है
मक्का की खेती के मुख्य चरण इस प्रकार हैं
खेत की तैयारी
मिट्टी को भुरभुरा बनाने और पिछली फसल के अवशेषों को हटाने के लिए 6-7 बार जुताई करें
खेत में 4-6 टन प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद (रूड़ी की खाद) डालें
बुवाई का समय-
खरीफ मौसम (बरसात)- जो कि जून से जुलाई के बीच, वर्षा शुरू होने पर बुवाई करें
रबी मौसम- अक्टूबर से नवंबर के बीच
बसंत मौसम- फरवरी से मार्च के बीच
बीज और बुवाई-
बुवाई मेड़ (मेड़ों के किनारे और ऊपर) पर 3-5 सेंटीमीटर की गहराई पर करनी चाहिए
कतार से कतार की दूरी 60-75 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 22-24 सेंटीमीटर रखें
बीज उपचार बुवाई से पहले फफूंदनाशक दवा से जरूर करें
4.सिंचाई
अच्छे जल निकास का प्रबंध करें- खेत में पानी रुका हुआ नहीं होना चाहिए
सबसे महत्वपूर्ण अवस्थाएं- जब पौधा घुटने के कद का हो जाए फूल निकलने (नर मंजर/नर फूल) के समय और दाने भरने के समय। इन चरणों में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए तभी यह फसल अच्छी होगी
5.खरपतवार नियंत्रण-
बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली गोड़ाई और 40-45 दिन बाद दूसरी गोड़ाई करें ताकि रासायनिक नियंत्रण के लिए- बुवाई के 2 दिन के अंदर एट्राजीन (Atrazine) 50% WP का उपयोग कर सकते हैं
फसल किस मिट्टी में कैसी होती है
(Suitable Soil for Maize) सबसे उपयुक्त मिट्टी-बलुई दोमट मिट्टी (Sandy Loam Soil)
मक्का की खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है जिसमें अच्छी जल निकासी और जल धारण क्षमता हो और पीएच स्तर 5.5 से 7.5 के बीच हो- भारी काली मिट्टी जल निकासी में खराब होने के कारण मक्का के लिए उपयुक्त नहीं करनी चाहिए
मिट्टी के गुण
अच्छी जल निकासी- जलभराव से बचाने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है
जल धारण क्षमता- अच्छी मात्रा में पानी को रोक कर रखती है
pH स्तर- 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए जिसमें 5.8 से 6.8 सबसे अच्छा माना जाता है
उपयुक्त मिट्टी का प्रकार
दोमट मिट्टी- यह अच्छी जल निकासी और जल धारण क्षमता का संतुलन प्रदान करती है और मक्का जैसी फसलों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है
भारी काली मिट्टी- इसकी जल निकासी खराब होती है इसलिए यह मक्का के लिए उपयुक्त नहीं करनी चाहिए
फसलों में लगने वाली बीमारी दवाई और खाद (Diseases, Medicines, and Fertilizer)
रोग और उपचार
मक्का में लगने वाले कुछ प्रमुख रोग और उनके नियंत्रण
रोग का नाम (Disease Name)
लक्षण (Symptoms)
.पत्ती झुलसा (Leaf Blight)
पत्तियों पर भूरे-पीले रंग के धब्बे/झुलसे हुए निशान
.नियंत्रण/दवाई (Control/Medicine)-
रोग प्रतिरोधी किस्में लगाएं रोग दिखने पर मैनकोजेब (Mancozeb) नामक फफूंदनाशक का 0.2% घोल (2 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करें
2.डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew)
. नई पत्तियों पर हल्के पीले या सफेद धारियां
. बीज को बुवाई से पहले उपचारित करें (जैसे मेटलैक्सिल (Metalaxyl) 4 ग्राम/किलो बीज) रोगग्रस्त पौधों को तुरंत हटा दें
3.तना छेदक कीट (Stem Borer)
. पौधे के तने में छेद और बीच की पत्ती सूख जाना पर (डेड हार्ट)
.संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें। कीटनाशक (जैसे कार्बोफ्यूरान या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल) का उपयोग करें
4.फॉर्मी आर्मीवॉर्म (Fall Armyworm)
. पत्तियों पर छेद, गोभ (शीर्ष भाग) में लार्वा
. शुरुआत में नीम का तेल (Neem Oil) का छिड़काव करें- गंभीर प्रकोप पर इमामेक्टिन बेंजोएट या स्पिनटोरम जैसे कीटनाशकों का प्रयोग करना है
5. खाद और उर्वरक (Fertilizer)
उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की जांच के आधार पर फसल करना सबसे अच्छा है, लेकिन सामान्यत
. रूड़ी की खाद (गोबर की खाद) खेत की तैयारी के समय 4-6 टन प्रति एकड़ जमीन पर फसल हो
. नाईट्रोजन (N) फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) संतुलित मात्रा में प्रयोग करना चाहिए
. नाईट्रोजन- मुख्य रूप से यूरिया, इसे दो या तीन भागों में सिंचाई के साथ दें
फॉस्फोरस और पोटाश- बुवाई के समय देंनी चाहिए
फसल फायदे और इनकम (Benefits and Income)
मक्का की खेती के फायदे (Benefits)
1. बहु-उपयोगिता (Versatile Use)
. भोजन- पॉपकॉर्न, स्वीटकॉर्न, कॉर्नफ्लोर, कॉर्न एवं फ्लेक्स
. पशु आहार- डेयरी पशुओं और मुर्गी पालन (पोल्ट्री) के लिए मुख्य चारा
. औद्योगिक- स्टार्च, तेल, इथेनॉल (Ethanol), शराब और बायोफ्यूल के उत्पादन में कच्चा माल
2. अच्छी उपज- मक्का की पैदावार (उत्पादकता) अन्य अनाजों जैसे गेहूं- की तुलना में अधिक हो सकती है
जलवायु अनुकूल- यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी और जलवायु में उगाई जा सकती है।
पोषक तत्व- मक्का प्रोटीन, विटामिन ए और फाइबर से भरपूर होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है
इनकम और मुनाफा (Income and Profit)
. उत्पादन उन्नत किस्मों और सही प्रबंधन से प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल तक उत्पादन किया जा सकता है
. आय (Income): मक्का की आय कई कारकों पर निर्भर
करती है जैसे बाजार भाव, किस्म (सामान्य मक्का, स्वीट कॉर्न बेबी कॉर्न) और खेती की लागत
. एक अनुमान के अनुसार बेबी कॉर्न या स्वीट कॉर्न की व्यावसायिक खेती से प्रति हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) ₹2.5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है जिसमें से ₹1.5 से ₹2 लाख रुपये तक का मुनाफा होगा
. कम लागत, ज्यादा कमाई_ मक्का गेहूं और धान के मुकाबले ज्यादा फायदे वाली फसल होता है- खासकर बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की मांग शहरों के पास ज्यादा होती है जिससे अच्छा मुनाफा मिलता है