दंडकारण्य सेहत संदेश : एलोवेरा प्रकृति का अमृत , स्वास्थ्य, सौंदर्य और संतुलन तीनों का संगम हैं , औषधिय पौधों का राजा 

 एलोवेरा

 

एलोवेरा प्रकृति का अमृत , स्वास्थ्य, सौंदर्य और संतुलन तीनों का संगम हैं , औषधिय पौधों का राजा 

परिचय

आज हम बात करेंगे एक ऐसे अद्भुत पौधे की, जिसे घृतकुमारी या एलोवेरा कहा जाता है। एलोवेरा एक रसीला पौधा है, जिसकी मोटी हरी पत्तियों के अंदर पारदर्शी जेल भरा होता है। यह पौधा न केवल हमारे सौंदर्य का रक्षक है, बल्कि यह एक अद्भुत औषधि भी है।

एलोवेरा मुख्यतः गर्म और शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है। एलोवेरा की पत्तियों में पाया जाने वाला जेल विटामिन A, C, E, और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है।

औषधीय गुण – 

1.एलोवेरा का जेल घावों और जलन को जल्दी भरने में सहायक है

2. पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या दूर करता है।

3. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा संक्रमण और मुंहासों से बचाव करते हैं।

4. यह त्वचा को नमी प्रदान करता है और झुर्रियों को कम करता है।

5. एलोवेरा जूस रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर में मौजूद विषैले तत्वों को शरीर से बाहर करता है।

एलोवेरा का उपयोग – 

एलोवेरा जूस का सेवन प्रतिदिन सुबह करने से शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है

सौंदर्य प्रसाधनों में एलोवेरा जेल का उपयोग त्वचा को कोमल और चमकदार बनाए रखने के लिए किया जाता है।

बालों की देखभाल में यह रूसी हटाने, बालों को मज़बूत करने और चमक लाने में सहायक है।

आयुर्वेदिक औषधियों में इसे पाचन और यकृत (लिवर) से जुड़ी समस्याओं के इलाज में उपयोग किया जाता है।

एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जो हमें स्वास्थ्य, सौंदर्य और संतुलन तीनों का संगम हैं

इसे घर में लगाना आसान है और इसका प्रति दिन उपयोग निश्चित ही लाभ करो होता है।

एलोवेरा का उपयोग किन्हें नहीं करना चाहिए – 

1.गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ

– एलोवेरा जूस या लेटेक्स (पीला भाग जो छिलके के अंदर होता है) गर्भाशय में संकुचन कर सकता है, जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ता है।

– स्तनपान कराने वाली महिलाओं में यह दूध के जरिए बच्चे तक पहुँच सकता है, जो शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है।

2. त्वचा पर एलर्जी वाले लोग

कुछ लोगों को एलोवेरा जेल लगाने से लाल चकत्ते, खुजली या जलन हो सकती है। ऐसे लोगों को एलोवेरा के उपयोग से बचना चाहिए

3. कम रक्तचाप वाले व्यक्ति

एलोवेरा रक्तचाप को कम कर सकता है।

जिन लोगों को लो ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें एलोवेरा जूस नियमित रूप से नहीं लेना चाहिए।

4.मधुमेह (डायबिटीज़) के मरीज

एलोवेरा शुगर लेवल को घटाता है।

अगर आप ब्लड शुगर कम करने की दवा ले रहे हैं, तो एलोवेरा लेने से शुगर बहुतदा गिर सकती है – यानी हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा बढ़ जाता है।

5. गुर्दे (किडनी) की समस्या वाले लोग

एलोवेरा लेटेक्स में मौजूद तत्व किडनी पर दबाव डालते हैं।

लंबे समय तक उपयोग करने से किडनी फेलियर तक का खतरा बढ़ सकता है।

6. बच्चों और बुजुर्गों के लिए

बच्चों का पाचन तंत्र नाजुक होता है- एलोवेरा जूस दस्त या पेट दर्द कर सकता है। बुजुर्गों में यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन पैदा कर सकता है।

एलोवेरा को रोजगार के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है

एलोवेरा की खेती एक कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय है।

मिट्टी और जलवायु

इसे दोमट या हल्की रेतीली मिट्टी जिसमें जल निकास अच्छा हो तथा pH: 7-8 के बीच उपयुक्त है।

एलोवेरा के लिए गर्म और शुष्क इलाका बेहतर होता है 20°C से 40°C तक तापमान ठीक रहता है।

खेती करने के पहले 

खेत को 2-3 बार जोतकर भुरभुरा करते हैं

गोबर की खाद या कम्पोस्ट (10-15 टन प्रति हेक्टेयर) डालते हैं तथा नमी और जलभराव से बचाव के लिए मेड़ या उठी हुई क्यारियाँ (beds) बनाएं

एलोवेरा पौधे को “चूस (suckers)” या “ऑफसेट्स” से उगाया जाता है।

पौधे की लंबाई लगभग 20-25 सेमी होनी चाहिए।

रोपाई की दूरी

पौध से पौध = 30-40 सेमी कतार से कतार = 45-60 सेमी

शुरुआती दिनों में हर 2-3 हफ्ते पर हल्की सिंचाई करें।

बरसात के मौसम में सिंचाई बंद कर दें। पानी रुकने न दें – इससे जड़ सड़ सकती है।

खाद और देखभाल

हर 3 महीने में जैविक खाद डालें।

खरपतवार (घास) को नियमित रूप से निकालें।

कीट या फफूंदी से बचाने 5- 6 बार नीम का घोल छिड़क सकते।

फसल कटाई 

8-10 महीने बाद पत्तियाँ तैयार हो जाती हैं।

बाहरी पत्तियों को तेज चाकू से सावधानी से काटें।

एक पौधे से साल में 3-4 बार कटाई की जा सकती है।

मार्केटिंग और उपयोग

पत्तियों को सीधे कॉस्मेटिक या जूस बनाने वाली कंपनियों को बेच सकते हैं।

खुद का छोटा एलोवेरा जूस या जेल यूनिट लगाकर और अधिक मुनाफा ले सकते हैं।

लाभ

सही स्थान और मार्केटिंग मिलने पर एक हेक्टेयर से औसतन ₹4-5 लाख तक सालाना आमदनी कमा सकते हैं।

 

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