
संवाददाता- दीपक गोटा
पूर्वी बस्तर डिवीजन की सप्लाई टीम के एक लाख इनामी महिला समेत तीन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक महिला समेत तीन नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण ये तीनों लंबे समय से हिंसा और नक्सली गतिविधियों में शामिल थे लेकिन अब उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है
जिले में सक्रिय 3 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में एक महिला नक्सली भी शामिल है
इन नक्सलियों के आत्मसमर्पण को पुलिस की नक्सल विरोधी रणनीति की सफलता माना जा रहा है समर्पण के बाद- इन सभी को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा जिसके तहत उन्हें मुख्यधारा में लौटने में मदद दी जाएगी
जानकारी के अनुसार, महिला नक्सली सिरबत्ती उर्फ बत्ती कोर्राम पूर्वी बस्तर डिवीजन की सप्लाई टीम में सक्रिय थी जिस पर राज्य सरकार ने एक लाख रूपये का इनाम घोषित किया था वहीं- दो अन्य पुरुष नक्सली-जगत राम (डीएकेएमएस सदस्य- मातला क्षेत्र) और लच्छन (डीएकेएमएस सदस्य- किसकोड़ो क्षेत्र)-लंबे समय से नक्सली संगठन से जुड़े हुए थे
कोंडागांव पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित एक आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान तीन नक्सलियों ने मुख्यधारा में शामिल होने के कारणों का खुलासा किया
उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई नक्सली संगठन के भीतर बढ़ते आपसी मतभेद वरिष्ठ नक्सलियों के आत्मसमर्पण और एक सुरक्षित पारिवारिक जीवन जीने की इच्छा ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया
छत्तीसगढ़ में तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत आत्मसमर्पण किया जिसके बाद उन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर 50-50 हजार रुपये दिए गए उन्हें पुनर्वास की अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जा रही हैं
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्श) रूपेश कुमार डाण्डे- डीएसपी (ऑप्श) सतीष भार्गव तथा सीआरपीएफ 188वीं और 12वीं बटालियन के अधिकारी उपस्थित रहे
यह आत्मसमर्पण अभियान पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज पी – डीआईजी उत्तर बस्तर अमित तुकाराम काम्बले और सीआरपीएफ डीआईजी एस- अरुल कुमार के निर्देश पर चलाया गया था
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियान सामुदायिक पुलिसिंग (सिविक एक्शन कार्यक्रम) और सरकारी विकास योजनाओं के कारण ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा है- इसी भरोसे के चलते कई नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कभी आतंक का गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ और उत्तरी बस्तर के कुछ हिस्सों को अब नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है
अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण के पीछे विकास और सरकार की योजनाओं का महत्वपूर्ण योगदान है नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर संविधान में विश्वास जताया है जो इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है