
भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक , डॉ होमी जहांगीर भाभा जयंती ,भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, महाराष्ट्र
भारत के नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम की परिकल्पना का श्रेय महान वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा को जाता है
डॉ. भाभा के प्रयासों से वर्ष 1953 में परमाणु ऊर्जा आयोग द्वारा मुम्बई के ट्राम्बे में परमाणु ऊर्जा संस्थान की नींव रखी गई थी.
30 अक्टूबर 1909 को जन्में डॉ. भाभा ने आधुनिक भारतीय परमाणु विज्ञान को नई दिशा दी.
डॉ. भाभा की मृत्यु के उपरांत श्रद्धांजलि स्वरूप इसका नाम भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र कर दिया गया.
डॉ भाभा का जीवन और परमाणु अनुसंधान केन्द्र में योगदान
जन्म और शिक्षा- उनका जन्म 30 अक्टूबर, 1909 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मुंबई से पढ़ाई के बाद कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन बाद में भौतिकी में अपनी रुचि के कारण इसमें डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की।
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना करने और उसे आकार देने का श्रेय डॉ. भाभा को जाता है। उन्होंने देश को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
संस्थानों की स्थापना – उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, ट्रॉम्बे (AEET) की स्थापना की, जिसका नाम बाद में उनके सम्मान में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) कर दिया गया।
उन्हें “प्राथमिक कणों और उनकी अंतः क्रियाओं के सिद्धांत” के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय का एडम्स पुरस्कार मिला, और उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।
डॉ भाभा केवल वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि उन्हें शास्त्रीय संगीत, चित्रकला और मूर्तिकला में भी गहरी रुचि थी। महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन उन्हें “भारत का लियोनार्डो डी विंची” कहते थे।
24 जनवरी, 1966 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, जिससे भारत ने अपने एक महान वैज्ञानिक को खो दिया।