
नक्सलवाद पर नेताओं की बयानबाज़ी और सियासी रणनीति, नक्सलवाद का अंतिम पड़ाव श्रेय और आरोप से घिरा…...
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब धीरे-धीरे अपने अंतिम पड़ाव पर दिख रहा है। एक ओर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलियों को करारा जवाब दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर माओवादी संगठनों के बड़े नेताओं का सामूहिक समर्पण नक्सली नेटवर्क के लिए खतरा बन गया है…इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी सर्कार के कार्यकाल में कार्यो को वजह बता रहे है वही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में सही सहयोग नहीं किया जिसके चलते नक्सल गतिविधियां निरंतर बढ़ रही थीं।
जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 तक के आंकड़े –
2,100 नक्सलियों ने आत्मसमर्पणकिया, 1,785 नक्सली गिरफ्तार किए गए तथा 477 नक्सली ऑपरेशन में मारे गए/निष्क्रिय
बरामद हथियार- AK-47, INSAS, SLR, .303 राइफल सहित सैकड़ों आधुनिक हथियार
एक ओर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलियों को करारा जवाब दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर माओवादी संगठनों के बड़े नेताओं का सामूहिक समर्पण नक्सली नेटवर्क का समपर्ण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बयान देते हुए कहा कि नक्सलवाद पर नियंत्रण की नींव कांग्रेस सरकार ने रखी थी। उन्होंने कहा विकास, विश्वास और सुरक्षा योजना हमारी थी। हमने बस्तर में सबका विश्वास जीता था, अबूझमाड़ क्षेत्रों में पट्टा वितरण किया गया था। जब लोगों का विश्वास जीता, तो नक्सलवाद कम हुआ। यही नीति नक्सलवाद की कमर तोड़ने में कारगर रही।
भूपेश बघेल ने नक्सलवाद खत्म करने की समय-सीमा डेडलाइन पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि नक्सलवादियों की एक घटना से दहशत फैल जाती है और यह आतंक पूरी दुनिया में असर डालता है। बघेल ने कहा कि जो लोग नक्सलवाद को समझते हैं, वे जानते हैं कि इसे समय-सीमा में खत्म करना मुश्किल है।
भूपेश बघेल पूर्व मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बघेल के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और जवान लगातार मजबूती से लड़ाई लड़ रहे हैं। सीएम साय ने कहा, पिछले 22 महीनों से सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। जब कांग्रेस की सरकार थी तब राज्य में 70 प्रतिशत से ज्यादा नक्सलवाद बाकी था। अगर कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में सही सहयोग किया होता, तो बस्तर से इतनी बड़ी संख्या में नक्सली नहीं बचते।छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार का दावा है कि अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। पिछले कुछ महीनों में बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा इलाकों में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं, कई बड़े नक्सली नेताओं को सुरक्षा बलों ने ढेर भी किया है।
विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और विकास ही स्थायी समाधान है।
नक्सलवाद भले ही कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन इस मुद्दे पर सियासत एक बार फिर गर्मा गई है।बस्तर की धरती पर अब लड़ाई सिर्फ बंदूक की नहीं बल्कि बयानबाज़ी और सियासी रणनीति की भी है।