
संवाददाता – दीपक गोटा
10 करोड़ ईनामी नक्सल संगठन के शीर्ष विचारक मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल (भूपति) सहित अन्य 60 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण ,नक्सल संगठन को एक बार फिर लगा बड़ा झटका ..
नक्सल संगठन के शीर्ष विचारक मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल उर्फ भूपति पर 6 से 10 करोड़ ईनामी नक्सलि सहित – 60 अन्य कैडरों के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण यह माओवादी संगठन आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है
भूपति की पहचान – भूपति (उम्र 69), जिसे सोनू और सोनू दादा के नाम से भी जाना जाता है सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो का सदस्य था और संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक था, उस पर कई राज्यों में 6 से 10 करोड़ रूपये तक का इनाम था। वह लगभग 40 सालों से नक्सली गतिविधियों में शामिल रहा था।
नक्सल संगठन के शीर्ष विचारक मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल उर्फ भूपति ने गढ़चिरौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। भूपति अपने साथ 60 नक्सलियों और 54 हथियारों सहित सामने आया।
छत्तीसगढ़ और उससे सटे हुए महाराष्ट्र के गढ़चिरौली को 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त करने का दम भरनेवाली टीम अमित शाह के लिए सबसे ज्यादा सुकून वाला दिन होगा ।नक्सलियों का मुख्य प्रवक्ता अपने लिटरेचर, अपनी प्रेस रिलीज से देश दुनिया में नक्सलियों के प्रति सहानभूति जुटाता था।
अभय उर्फ सोनू उर्फ भूपति उर्फ मल्लोजुल्ला वेणुगोपाल ने गढ़चिरौली पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया।
अभय, नक्सल संगठन की लड़ाई को ऐसे तर्क-वितर्क देकर जनता के सामने प्रस्तुत करता कि हजारों किमी दूर बैठे नौजवान के मन में नक्सल संगठन के लिए एक सहानभूति जागता था उसे लगता कि नक्सली ही आदिवासियों के न्याय के लिए क्रांति की असली लड़ाई लड़ रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडर – आत्मसमर्पण करने
वाले 60 कैडरों में एक केंद्रीय समिति का सदस्य थे, तीन दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और 10 डिवीजनल कमेटी के सदस्य शामिल थे।
6 से 10 करोड़ का ईनामी भूपति अपने साथ अपनी टीम के 60 खूंखार नक्सलियों साथियों को भी लेकर आया -जिन्होंने 54 हथियार भी पुलिस के सामने सरेंडर किए है. इसमें मल्लोजुला वेणुगोपाल और उसके गार्ड्स की ऑटोमैटिक एके 47 रायफलों के साथ 10 ऑटोमैटिक वेपंस भी ठाले. ये पुलिस इतिहास में अबतक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण होगा जिसमें एक पोलित ब्यूरो अपने साथ इतनी बड़ी संख्या में नक्सली और हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया है
आत्मसमर्पण का कारण – भूपति ने कुछ महीनों पहले माओवादी आंदोलन की गिरती विचारधारा- कैडरों के भारी नुकसान और मनोबल में गिरावट का हवाला देते हुए आत्मसमर्पण करने का संकेत दिया था।
हथियार- सरेंडर करने वालों ने 54 हथियार भी सौंपे, जिनमें 7 एके-47 और 9 इंसास राइफलें शामिल हैं
अभी भी कुछ बड़े नक्सली नेता सक्रिय हैं
वेणुगोपाल में सैन्य और संगठन साधने के लिए पर्याप्त बुद्धि थी उसके आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों के जंगल में मौजूद थिंक टैंक पोलित ब्यूरो में सिर्फ महासचिव देवजी, पोलित ब्यूरो मिशर बेसरा और नक्सलियों के पूर्व महासचिव और पोलित ब्यूरो गणपति बचे हुए हैं
नक्सलियों के 9 पोलित ब्यूरो को पिछले डेढ़ वर्ष में सुरक्षाबल के जवानों ने मार गिराया है जिनमें उनके महासचिव बसवराजु+पोलित ब्यूरो चलपती- मॉडेम बालकृष्ण-कोसा- रामचंद्र रेड्डी – जैसे बड़े और एक-डेढ़ करोड़ से ज्यादा के इनामी नक्सलियों का समावेश है।
सबसे कोर जोन में नक्सली हो रहे कमजोर
वेणुगोपाल नक्सलियों के सेंट्रल रीजनल ब्यूरो का सचिव भी था. यह रीजनल ब्यूरो छत्तीसगढ़ की सभी सीमाओं से लगे प्रदेशों और अबूझमाड़ को जोड़कर बनता है।
ये नक्सलियों का अबतक का सबसे कोर जोन था कहते है अगर माओवादियों ने आत्मसमर्पण नहीं किया तो अबूझमाड़ में ही सुरक्षाबल के जवानों और नक्सलियों के बीच आखरी लड़ाई होंगी सोनू और उसकी टीम के आत्मसमर्पण से ये रीजनल ब्यूरो पूरी तरह कमजोर हुआ है और यहां बचे हुए नक्सलियों को पस्त करने में सुरक्षाबल के जवानों को बेहद आसानी होगी।
वेणुगोपाल और भाई किशनजी की पत्नी ने वेणुगोपाल के कहने पर साथ में किया सरेंडर
वेणुगोपाल के बड़े भाई किशनजी उर्फ रामजी उर्फ मल्लोजुल्ला कोटेश्वर का एनकाउंटर 2011 में पश्चिम बंगाल पुलिस ने किया था वो माओवादियों के पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े नेता थे 5 महीने पहले वेणुगोपाल के कहने पर किशनजी की पत्नी और वेणुगोपाल की पत्नी तारक्का ने गढ़चिरौली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था।
वेणुगोपाल का आत्मसमर्पण को लेकर पत्र जिसका महासचिव ने किया था विरोध।
15 सितंबर को वेणुगोपाल ने नक्सलियों के मुख्य प्रवक्ता अभय के नाम से एक पत्र जारी किया था. जिसमें उसने यह बताया था कि अब देश की परिस्थिति बदल चुकी है.
नक्सल आंदोलन जिन परिस्थितियों में शुरू हुआ था अब उसकी जरूरत नहीं है और माओवादी अब सक्रिय राजनीति में आकर देश की सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर लड़ना चाहते है. वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कहने पर सरकार के समक्ष हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने तैयार है. इस पत्र को 15 अगस्त को ही जारी किया जाना था लेकिन कुछ माओवादी इसका विरोध कर रहे थे
जिसके चलते पत्र 1 माह बाद वेणुगोपाल ने जारी किया लेकिन पत्र में तारीख वही रह गई. इस पत्र के आने के कुछ ही दिनों बाद माओवादियों के महासचिव देवजी ने एक पत्र जारी किया जिसमें उसने वेणुगोपाल के आत्मसमर्पण के पत्र को माओवादी विचारधारा के खिलाफ बताया इसे वेणुगोपाल के निजी विचार बताया
वेणुगोपाल की हत्या करने वाले थे माओवादी
पांच महीने पहले वेणुगोपाल की पत्नी के सरेंडर के बाद से माओवादियों की सेंट्रल कमेटी में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि वेणुगोपाल खुद भी आत्मसमर्पण कर सकते है. इसके चलते वेणुगोपाल उर्फ सोनू की जान को उन्हीं के साथियों से जान का खतरा हो गया था. बसवराजु के मरने के बाद गणपति का स्वास्थ्य कारणों से महासचिव नहीं बनना तय था
इसके बाद संगठन में सबसे सीनियर नेता वेणुगोपाल ही थे लेकिन पार्टी ने उनसे जूनियर देवजी को महासचिव बनाया,बताया जाता है कि शहरी क्षेत्रों में मौजूद नक्सलियों के पोलित ब्यूरो और जंगल में मौजूद पोलित ब्यूरो ने आत्मसमर्पण के तरफ झुकने की वजह से वेणुगोपाल को महासचिव नहीं बनाया गया,वहींं उनकी हत्या भी की जा सकती थी लेकिन वेणुगोपाल पिछले कुछ महीनों से अपनी टीम के साथ नक्सलियों के अन्य दस्ते से अलग-थलग रह रहे थे।
आगे की प्रक्रियाः आत्मसमर्पण के बाद भूपति को एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और उससे खुफिया अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं,भूपति और उसके सहयोगी 16 अक्टूबर, 2025 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने औपचारिक रूप से हथियार डालेंगे।
यह आत्मसमर्पण माओवादी आंदोलन को कमजोर करने में एक महत्वपूर्ण कदम है ।