
संवादाता – दीपक गोटा
कभी जंगलों की खाक छानने वाली हथेलियों में आज मेंहदी सजी है मुख्यधारा में लौटने वाले आत्मसमर्पित नक्सली जोड़े की अनोखी शादी ,थाना परिसर में दोनों बंधे विवाह के बंधन में..
बस्तर अंचल से एक ऐसी शादी हुई है जो उम्मीद, बदलाव और नई शुरुआत की मिसाल पेश करती है। यहाँ जोड़ा कभी जंगलों में बंदूक थामे घूमने वाले नक्सली संगठनों का हिस्सा हुआ करते थे पर आज समाज की मुख्यधारा में लौट आए और अब उनकी हाथों में मेहंदी और रिश्तों की डोर सजी है।
कांकेर जिले का पखांजुर थाना परिसर रविवार को एक अनोखा पल और प्रेरणादायक विवाह का साक्षी बना है यहां आत्मसमर्पित नक्सली सागर हिरदो और सचिला मांडवी ने एक-दूसरे का हाथ थाम कर नई जिंदगी की शुरुआत की फूलों से सजे मंडप में मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का वादा किया।
थाना परिषर में हुआ यह विवाह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था इस क्षेत्र में कभी बंदूक और हिंसा का साया था अब वहां प्रेम और शांति एवं विश्वास का संदेश गूंज रहा है वहां पुलिस अधिकारी ग्रामीण और समाज के लोग इस नए जीवन की शुरुआत के गवाह बन रहे हैं ।
जानकारी के अनुसार सागर हिरदो वर्ष 2014 में नक्सल संगठन से जुड़ा था और दिसंबर 2024 में पखांजुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था अब वहीं सचिला मांडवी ने वर्ष 2020 में नक्सल संगठन का दामन छोड़ा और उसी वर्ष पुलिस के समक्ष सरेंडर किया था -आत्मसमर्पण के बाद दोनों पुनर्वास योजना के तहत समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए
इसी दौरान दोनों की पहचान हुई और यह रिश्ता विवाह के रूप में परिणित हुआ
इस सकारात्मक पहल में पखांजुर थाना प्रभारी लक्ष्मण केवट और गोण्डाहुर थाना प्रभारी रामचंद्र साहू की अहम भूमिका रही थी जिन्होंने समाज में लौटे इन युवाओं को नई शुरुआत के लिए प्रेरित किया था
इस जोड़े ने यह साबित कर दिया है कि नक्सलियों के लिए भी हिंसा की अंधेरी राह से नए जीवन का सूरज निकल सकता है अगर वे मुख्यधारा से जुड़ जाएं तो यह विवाह सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और प्रेम से भरे नए बस्तर की तस्वीर बन जाएगी
यह विवाह इस बात का प्रतीक है कि हिंसक जीवन छोड़ने के बाद भी नई और सम्मानजनक शुरुआत संभव है।
पखांजुर थाना परिसर रविवार को पूरा नज़ारा बदला हुआ है फूलो से चौकी सजी और थाना परिषर में मंडप सजे जिसमे एक ऐसे जोड़ी विवाह बंदन में बंधा जो कि कभी हाथों में बंदूक हथियार लिए जंगलो की खाक छाना करते थे जो अब शांति और प्रेम के रास्ते पर निल पड़े हैं यह जोड़ी सागर हिरदो और सचिला मांडवी की है
विवाह राज्य सरकार की पुनर्वास नीतियों की सफलता का उदाहरण है, जो आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देती हैं ।