
अंडरट्रायल कैदियों पर जेल अधिकारियों द्वारा हमला सात माओवादी नाबालिक कैदियों की ऑस्सिफिकेशन टेस्ट करवाने का आदेश ।
चंचलगुड़ा सेंट्रल जेल में सात अंडरट्रायल कैदियों पर जेल अधिकारियों द्वारा कथित रूप से हमला किए जाने का मामला सामने आया है।ये सारे कैदी आदिवासी समुदाय से है जिनपर माओवादी होने का आरोप लगा है । अधिकारियों द्वारा हमला इस घटना के विरोध में कैदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जेल अधीक्षक शिवकुमार के आदेश पर डिप्टी जेलर लक्ष्मण बाबू और अन्य कर्मचारियों ने शनिवार को कैदी संदीप को पीटा और उसके बाद सभी सात कैदियों को अलग-अलग कोठरियों में रख दिया गया। इनमें से कुछ कैदियों को नाबालिग बताए जा रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पहले ही हैदराबाद की एनआईए अदालत में उनकी उम्र की जांच के लिए अनुज्ञा परीक्षण (ऑस्सिफिकेशन टेस्ट) कराने का आवेदन किया था, जिसे अदालत ने मंजूरी दे भी दी है।
नागरिक अधिकार संघ, तेलंगाना के उपाध्यक्ष प्रोफेसर गुंटी रवि ने इस घटना की निंदा करते हुए मांग की है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही, जेल अधीक्षक शिवकुमार, डिप्टी जेलर लक्ष्मण बाबू और संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जेल न्यायाधीश को विशेष जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
मानवाधिकार संगठनों ने यह आरोप लगाया है कि जेल प्रशासन ने बिना अदालत की अनुमति के इन कैदियों को एकांतवास (अलग – अलग कोठरियों में)में डाल दिया, जबकि यह कानूनी तौर पर अपराध है। साथ ही, उन्हें नाले की सफाई जैसे काम करने के लिए मजबूर किया गया और जिन कैदियों ने इनकार किया उन्हें बहुत बुरी तरह से मारा पीटा जा रहा है।