Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बेसहारा और घुमंतू गौ वंश की रक्षा के लिए गौ सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने उठाया एक बड़ा – कदम गौ सेवा दल के द्वारा गौ पालकों से गाय बैल को अपने- अपने घरों पर रखने का आग्रह

छत्तीसगढ़ में बेसहारा और घुमंतू गौ वंश की रक्षा के लिए गौ सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने उठाया एक बड़ा – कदम गौ सेवा दल के द्वारा गौ पालकों से गाय बैल को अपने- अपने घरों पर रखने का आग्रह

मानव जीवन के लिए लोगों की समस्याओं को देखने और उनका इलाज करने के लिए तो कई छोटे बड़े अस्पताल बने हैं। लेकिन बनुबान और बेसहार पशुओं के विषय में बहुत कम ही लोग सोच पाते हैं ।

 

 

यह एक गंभीर विषय है जैन समाज का नारा है जियो और जीने दो ऐसे ही सोंच के साथ नारायणपुर जिले में सामाजिक संस्था गौ सेवा दल ने पूरे समाज का ध्यान आकर्षित करते हुए पशु सेवा को आगे बढ़ाने के लिए समाज के लोगों में गौ सेवा को जागृत करने की कोशिश की गई है।

जैन समाज के लोगों के द्वारा इस सेवा कार्य की जानकारी दी गई कि, वर्षा ऋतु और मौसम के थपेड़ों के कारण इंसान तो क्या पशु पक्षियों को भी कई तरह तरह की बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।

 

 

 

 

इसलिए गौ सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने समस्त जिले वासियों से निवेदन किया है कि, अपने गाय बैल को घर पर रखें तथा उनको बेसहारा खुले में सड़को पर ना छोड़ें इनके कारण बल्कि गौ माता को घर पर रखे उनका भी देखभाल करे ऐसा करने से आपके घर में माता लक्ष्मी का वास होगा और कई बीमारियों को रोकने में गौ माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है सभी गाय बैल के मालिकों से और लोगों से निवेदन है कि वह अपने पशुओं को घर में रखें उन्हें आश्रय दें साथ ही सभी लोगों से आग्रह की है कि किसी भी खाने पीने की सामग्रियों को पॉलीथिन में रखकर ना फेंके और जाने अनजाने गौ हत्या के पाप से बचें लोगो की एक सावधानी बेजुबानों को बड़ी बड़ी बीमारी की चपेट में जाने से रोक सकती है।

 

वाहन चालकों से भी कहा की गाड़ी ध्यान से चलाएं एक बार इन पशुओं को चोट पहुंचता तो इलाज न मिल पाने के कारण ये तड़प तड़प कर मर जाते हैं। जिसका पाप वाहन चालक और उसके परिवार को भोगना पड़ता है।

 

 

जिले में बेसहारा या घुमंतू गौ वंश जो मौसम की मार से बीमार हो जाते हैं या घायल अथवा चोटिल गौ वंश की पहचान कर तत्काल प्राथमिक उपचार गौ सेवा दल नारायणपुर कर रहा है।

 

 

उन्होंने बताया कि, बारिश में या बीमार होने से अथवा अन्य किसी भी कारण से नगर में मृत गौ माता का अंतिम संस्कार सनातन धर्म के विधि विधान के आधार पर जिले के गौ सेवकों के द्वारा किया जाता है।

 

 

इस बात को केवल वही लोग समझ सकते हैं जिसमें सभी जीवों के लिए प्रेम की भावना हो। तभी तो जियो और जीने दो की बात चरितार्थ होगा।

 

 

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