
मतदान करने का अधिकार 18 से घटाकर 16 साल करने का नेपाल की अंतरिम PM सुशील कार्की ने किया ऐलान देश के नाम पहली संबोधन में ही
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने आज पहली बार देशवासियों को संबोधित करते हुए आगामी चुनावों के समयबद्ध आयोजन की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई । अपने भाषण में उन्होंने विशेष रूप से युवाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी हैं ।उन्होंने अपनी पहली संबोधन में ये ऐलान किया कि नेपाल में मतदान की आयु 18 साल से घटाकर अब 16 साल कर दी गई है, ताकि (Gen-Z) आंदोलन के बाद अधिक से अधिक युवा मतदान प्रक्रिया में शामिल हो सकें। साथ ही मतदाता नामावली संकलन की समय सीमा एक महीने बढ़ा दी।
मतदाता नियमावली में संशोधन
प्रधानमंत्री कार्की ने मतदाता नियमावली में संशोधन को लेकर भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि Gen-Z समूहों की मांग के बाद मतदाता नामावली संकलन की समय सीमा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है. इससे युवाओं को मतदाता सूची में शामिल होने का पर्याप्त समय मिलेगा।इसके साथ ही उन्होंने विदेशों में रह रहे नेपाली नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देने के लिए कानून में संशोधन की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी।
उनका कहना था कि विदेशों में रह रहे नेपाली नागरिक भी अब अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे चुनाव में भागीदारी बढ़ेगी।
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि (Gen-Z ) आंदोलन के दौरान नेताओं के घर में मिली धनराशि की जांच के लिए डिपार्टमेंट ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग इंवेस्टिगेशन को निर्देशित किया गया है। यह कदम पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत देता है मतदान की आयु 16 वर्ष निर्धारित करने का नोटिफिकेशन जारी
प्रधानमंत्री के संबोधन के तुरंत बाद, नेपाल के निर्वाचन आयोग ने मतदान की आयु 16 वर्ष निर्धारित करने का नोटिफिकेशन जारी किया. आयोग ने स्पष्ट किया कि अब नेपाली नागरिक जिनकी उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक है, वे अपने स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक मतदाता पंजीकरण करा सकते हैं ।
यह कदम युवा मतदाताओं को सक्रिय रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है ।
राजनीतिक भागीदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मतदान की आयु घटाने और विदेशों में रहने वाले नागरिकों के लिए कानून में संशोधन करने जैसे कदमों से न केवल चुनावी प्रक्रिया में व्यापक सहभागिता बढ़ेगी, बल्कि देश में लोकतांत्रिक और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी