नारायणपुर में मनाया विश्व आदिवासी दिवस : संस्कृति और परंपराओं को बचाने का दिया संदेश, एक तीर एक कमान, सर्व आदिवासी एक समान..

नारायणपुर में मनाया विश्व आदिवासी दिवस

संस्कृति और परंपराओं को बचाने का दिया संदेश, एक तीर एक कमान, सर्व आदिवासी एक समान..

नारायणपुर जिले में विश्व आदिवासी दिवस पर विभिन्न आदिवासी समाज प्रमुखों एवं बुद्धिजन की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया । इसी कड़ी में आदिवासी परिवार और सर्व आदिवासी का कार्यक्रम नारायणपुर के परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया।

इस दौरान आदिवासी महिला, पुरुष, युवा और बच्चे आदिवासी पहनावे के साथ बाइक रैली और पैदल के रूप में पहुंचे। आदिवासी पारंपरिक नृत्य , धनकुल, गीत और कई तरह के रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया। वहीं आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों की सुरक्षा का संदेश दिया गया।

नारायणपुर के परेड ग्राउंड आदिवासी परिवार, सर्व आदिवासी समाज और अन्य सहयोगी समाज की ओर से विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम को लेकर सुबह 6 बजे से ही ग्राउंड में लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। दोपहर तक लोग रैली, वाहन रैली, डीजे की धुनों के साथ परेड ग्राउंड में बड़े धूमधाम से मनया।

युवक सफेद धोती, कुर्ता, माथे पर पगड़ी, सिंंगार माला, मोर पंख बांधकर आदिवासी पहनावे में पहुंचे, जबकि महिलाएं और युवतियां आदिवासी पहनावे, आदिवासी नृत्य पोशाक के साथ ही जेवरात पहनकर आईं। खुले ग्राउंड में हजारों की भीड़ में जय जोहार के नारे आदिवासी एकता जिंदाबाद गूंजते रहे।

बस्तर की कुलदेवी दंतेश्वरी माइ ,आदिवासी महापुरुषों की तस्वीरों के सामने दीप जलाए। इसके बाद कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिसमें स्थानीय युवक और युवतियों ने कई रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। जिसमें आदिवासी संस्कृति, वेशभूषा और रीति रिवाजों की झलक देखने को मिली। इस दौरान वक्ताओं ने सम्मेलन को संबोधित भी किया। जिसमें लोगों को संविधान में आदिवासियों को दिए गए अधिकारों के बारे में बताते हुए आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने और एकजुट होने का संदेश दिया।

नारायणपुर जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम ने आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज को बरगलाकर धर्म परिवर्तन की ओर षड्यंत्र रचा जा इस पर गंभीर चिंता करने की आवश्यकता है , समाज के द्वारा आदिवासी परंपरा, संस्कृति को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों  पर निशाना साधते हुए कहा कि  स्वार्थ के लिए आदिवासी  समाज का उपयोग करना बंद करें की परंपरा, रीति रिवाज के साथ जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए प्रयास की जा रही है ।

अब देश के विध्वंस ताकत को जवाब देना होगा जिस प्रकार आदिवासी समाज को तोड़ने का षड्यंत्र रचा जा रहा है इस पर गहरी चिंतन करना होगा आदिवासी हमेशा से पिछड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टी केवल आदिवासी को वोट बैंक समझने का काम नहीं करे। उनके अधिकारों को दिलाने का प्रयास करे।

साथ ही कार्यक्रम में शिक्षा,कला, आयुर्वेद चिकित्सा, बॉडीबिल्डिंग और समाजसेवी लोगों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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