CG: यहां पेड़ों से बरसता है मोती, खुशबू फैली हैं पूरे जंगल में,  मदहोश हैं यहां रहने वाले सभी प्राणी.. ..

नारायणपुर

 

वनों में रहने वाले सभी प्राणियों के लिए कल्पवृक्ष महुआ एक वरदान है ।

शाकाहारी पशु पक्षी इस मौसम का भरपूर फायदा उठाते हैं .

महुआ एक प्रकार की फूल है जिसकी खुशबू जानवरों को मदहोश कर देती है और अपनी ओर खींचता है सभी जनवर महुआ को खाने के लिए व्याकुल हो जाते हैं ।

ताजा महुआ का खुशबू दूर से ही पता चलता है मीठी खुशबू के कारण जंगल में होड़ मच जाता है।

 गांव और वन क्षेत्र में रहने वालों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन जाता हैं।

 महुआ आय का स्रोत है।

वनवासीयों के लिए कमाई का सबसे आसान स्रोत महुआ है,  हर साल लगभग 25 से 30 दिनों  तक इसे इकट्ठा करके महुआ को सुखाया जाता है, या फिर समय बढ़कर डेढ़ महीना भी हो सकता हैं।

इसके सूखे फूलों को बेचते हैं और अपना जीविका चलाते हैं ।

वनांचल में रहने वाले वनवासियों के लिए रोजगार का एक अच्छा साधन है,  महुआ का यह सीजन  ग्रामीणों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता हैं।

महुआ के फूल को इकट्ठा करने के लिए गांव और वनों में रहने वाले ग्रामीण सुबह के 4:00 से अपने साथ टोकरी पेज पानी और प्रकाश के लिए टॉर्च या आग का सहारा लेते हैं ।

महुआ के फूल को इकट्ठा करना कभी-कभी बहुत खतरनाक भी हो जाता है ग्रामीण अक्सर जंगली जानवरों के साथ आमना सामना हो जाता है।

जंगली जानवरों में भालू और जंगली सूअर को सबसे खतरनाक समझा जाता है । ग्रामीणों को महुआ इकट्ठा करते वक्त ये जानवर अक्सर हमला कर देते हैं। हर साल इस मौसम में जंगली जनवरों के हमला से कई ग्रामीणों की जान चली जाती हैं।

 ग्रामीण पूरे सीजन में 40 – 50 किलो से लेकर 5 क्विंटल से भी अधिक महुआ इकट्ठा कर लेते हैं। 

बाजार में इन दोनों महुआ के कीमत की बात कर तो 35 से ₹40 किलो भाव में खरीदा जा रहा हैं यह मूल्य निश्चित नहीं है इससे अधिक भी हो सकती है।

महुआ का उपयोग कैसे किया जाता है।

महुआ फुल के बारे में कई लोगों की  धारणा ये की महुआ बस देशी शराब बनाए जाते हैं।

गांवों में महुआ गायों,  बैलों, और  उपयोगी पशुओं को तंदुरुस्त बनाने के लिए खिलाया जाता हैं और कीमती दवा बनाई जाती है,

महुआ बहुत शक्ति वर्धक होता है  महुए के लड्डू और कई तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं,   व्यंजन जैसे महुए की खीर, पूरी और महुए वाला चीला खास हैं ।

 

Exit mobile version