
जिला चिकित्सालय नारायणपुर में हो रही अनियमितता का भंडाफोड़ और रहते हैं अनुपस्थिति –
अभी हाल ही में जिले में लगातार नक्सलियों के द्वारा जनप्रतिनिधियों का नरसंहार हो या सुरक्षा बलों के द्वारा नक्सलियों के विरुद्ध कार्यवाही। इसमे जिनकी की मृत्यु होती है उनके मृत शरीर को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय में लाया जाता है। उस समय जिला चिकित्सालय में उपस्थित कोई भी चिकित्सक उपस्थित नहीं होता है। उस वक़्त अस्पताल अधीक्षक उप स्वास्थ केन्द्रों से डॉक्टरों को बुलाते हैं जिससे पुलिस प्रशासन, परिवार जनों को पोस्टमार्टम के लिए घंटों की प्रतीक्षा करनी पड़ जाती है। जिला चिकित्सालय में 7 चिकित्सक की उपस्थिति के बावज़ूद उनको पोस्टमार्टम के कार्य में नहीं लगाया जाता है।
पूर्ववर्ती सरकार के विरोध में स्वास्थ्य विभाग के नियमित कर्मचारी 23 दिवसों का अनिश्चीत कालीन हड़ताल किए थे, जिसे शासन ने लोकसभा आचार संहिता के पूर्व कार्यवाही शून्य करने का आदेश दिया था परंतु आज दिनांक तक अस्पताल अधीक्षक द्वारा हड़तालों का वेतन आहरण सुनियोजित तरीके से चुनाव को प्रभावित करने के लिए नहीं किया गया है।
पूर्ववर्ती सरकार के समय जो अधिकारी 4 वर्षों तक अनाधिकृत रूप से सेवा से अनुपस्थित रहे उन्हें बिना किसी चरित्र प्रमाण पत्र के या बिना कारण जाने पदोन्नति के तौर पर प्रभारी अस्पताल अधीक्षक बना दिया गया। शासन के विरोध में शामिल हड़तालियों का सात माह का वेतन, अव्यावसायिक भत्ता आदि रोकना शामिल हैं। जो अधिकारी अपने सेवा से अनुपस्थित रहे उन पर किसी प्रकार की जाँच नहीं की गई है, अपने सेवा कार्यकाल में अनुपस्थित रहे ये अधिकारी किन संस्थानों के लिए कार्य कर रहे थे ये जाँच का विषय है। क्यों कि यह जिला अति संवेदनशील क्षेत्र में आता है, इनकी नियुक्ति भी इस जिले में जाँच का विषय है।
मुख्यमंत्री, गृहमंत्री भी नक्सलियों पर त्वरित कार्यवाही के लिए पुलिस प्रशासन को निर्देशित किये हुए हैं उसके बाद भी अस्पताल अधीक्षक को चिकित्सक दल बनाकर कार्यवाही करनी होती थी। ये दिखाई नहीं दे रहा है।